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गोरखपुर में इंसाफ की पुकार : पति की मौत के बाद दर-दर भटक रही विधवा, आरोपियों की धमकियों से दहशत

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गोरखपुर में इंसाफ की पुकार : पति की मौत के बाद दर-दर भटक रही विधवा, आरोपियों की धमकियों से दहशत


गोरखपुर, 22 अप्रैल (हि.स.)। जिले के थाना रामगढ़ताल क्षेत्र से एक दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां पति की आत्महत्या के बाद एक विधवा महिला न्याय की गुहार लेकर प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पीड़ितों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

पीड़िता निशा देवी ने आरोप लगाया है कि 14 अप्रैल 2026 को उनके पति स्वर्गीय पवन कुमार ने कुछ लोगों की प्रताड़ना और मानसिक दबाव से तंग आकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में सुसाइड नोट और वीडियो जैसे अहम साक्ष्य मौजूद हैं, जिनमें आरोपियों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आती है। इसके बावजूद अब तक किसी भी नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

थाना रामगढ़ताल में इस संबंध में मुकदमा संख्या 228/2026 दर्ज है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। लेकिन कार्रवाई की धीमी गति से पीड़ित परिवार गहरे असुरक्षा और भय के माहौल में जी रहा है। निशा देवी का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और लगातार उन्हें मुकदमा वापस लेने के लिए धमका रहे हैं। “हमारी जान को खतरा है, लेकिन हमारी सुनवाई कहीं नहीं हो रही,” उन्होंने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा।

इस संवेदनशील मुद्दे ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नगीना प्रसाद साहनी और साधु यादव ने घटना पर गहरा आक्रोश जताते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, तो आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी समझ से परे है। उन्होंने इसे न्याय व्यवस्था की निष्क्रियता बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

सपा नेताओं ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—नामजद आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी, पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान करना, तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को तत्काल सरकारी सहायता उपलब्ध कराना।

न्याय की उम्मीद में निशा देवी ने जिला अधिकारी को पत्र लिखकर अपनी गुहार लगाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और सुरक्षा नहीं मिली, तो वह कोई कठोर कदम उठाने के लिए विवश हो सकती हैं।

यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्याय में देरी किस प्रकार पीड़ितों के विश्वास को कमजोर करती है। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में कितनी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय