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गंगा चरण राजपूत ने भरी हुंकार 'राज्य दो, वोट लो'

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गंगा चरण राजपूत ने भरी हुंकार 'राज्य दो, वोट लो'


बांदा, 04 जुलाई (हि.स.)। सत्ताएं वोट से डरती हैं, इसलिए बुंदेलखंड के निवासियों को आगामी चुनाव से पहले 'राज्य दो, वोट लो' का अभियान गांव-गांव और गली-गली तक पहुंचाना होगा। यह हुंकार चार बार के पूर्व सांसद एवं 'बुंदेलखंड राज्य बनाओ मोर्चा' के संयोजक गंगा चरण राजपूत ने भरी। मंगलवार को स्थानीय जिला बार संघ कार्यालय में पत्रकारों और विभिन्न संगठनों को संबोधित करते हुए उन्होंने बुंदेलखंड की बदहाली, पलायन और पर्यावरणीय संकट का जमीनी खाका खींचते हुए अलग राज्य की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया।

पूर्व सांसद ने स्पष्ट किया कि यह किसी के खिलाफ बगावत नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों और नेताओं को उनके वादे याद दिलाने का एक लोकतांत्रिक संघर्ष है।

राजपूत ने कहा कि जब बीते 75 सालों में देश के भीतर 14 से 28 राज्य बन सकते हैं, तो एक बुंदेलखंड राज्य बनने में क्या परेशानी है? उन्होंने याद दिलाया कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का निर्माण करवाया और कश्मीर से धारा 370 हटाई। ये दोनों काम बेहद मुश्किल थे। उन्होंने वर्ष 2014 में झांसी की जनसभा में बुंदेलखंड राज्य बनाने का वादा किया था। अब समय आ गया है कि बुंदेलखंडवासी उनसे अपना यह तीसरा वादा पूरा करने की मांग करें।

बुंदेलखंड की मौजूदा भौगोलिक और आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राजपूत ने कई कड़वे सच सामने रखे । उन्हाेंने कहा 1947 में बुंदेलखंड में 30 फीसदी जंगल थे, जो अब कटकर मात्र 3 फीसदी रह गए हैं। अंधाधुंध खनन और पेड़ों की कटाई के कारण बांदा आज विश्व के सबसे गर्म शहरों में शुमार हो गया है। केन और बेतवा जैसी जीवनदायिनी नदियों की जलधाराएं खनन के चलते गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। रोजगार और उचित जीवन स्तर के अभाव में बुंदेलखंड की लगभग 40 फीसदी आबादी पलायन कर चुकी है। महानगरों में ईंट-भट्ठों, सिक्योरिटी गार्ड और मजदूरी के कामों में सबसे बड़ी संख्या बुंदेलखंडियों की ही है।उन्होंने 'जल जीवन मिशन' जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि धरातल पर अब भी कई गांवों में पानी नहीं पहुंचा है और टंकियों के निर्माण में गुणवत्ता की कमी देखी जा रही है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों और मंत्रियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

इस अवसर पर बुंदेलखंड के अलग-अलग संगठनों ने एक सुर में मोर्चा का समर्थन किया। बुंदेलखंड राज्य निर्माण संघर्ष समिति के संयोजक रमेश चंद्र दुबे, बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के अध्यक्ष प्रवीण पांडेय, और बुंदेलखंड नव निर्माण सेना के अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव ने एकजुट होकर संघर्ष की बात कही। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, बांदा ने भी अपना खुला समर्थन घोषित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह