बौद्ध सर्किट के सारनाथ को यूनेस्को की विरासत में शामिल हाेने से प्रदेश में बढ़ेगी बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या
लखनऊ, 08 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश का पर्यटन विभाग प्रदेश के धार्मिक, ऐतिहासिक, पौराणिक स्थलों को विभिन्न सर्किटों में बाँट कर उन स्थलों पर विभिन्न अवस्थापना सुविधाएं सृजित कर रहा है। पर्यटन सेक्टर में रोजगार एवं राजस्व की असीमित संभावनाओं को देखते हुए कनेक्टिविटी तथा कानून व्यवस्था की स्थिति को बेहतर से बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा दी गयी पर्यटन सुविधाओं के कारण ही विगत 9.5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रथम स्थान हासिल किया है। पर्यटन विभाग घरेलू पर्यटकों के मामले में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। विदेशी पर्यटकों के मामले में अभी देश में चौथे स्थान पर है। इसको प्रथम स्थान पर लाने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे है।
प्रदेश के धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थलों काशी, मथुरा, अयोध्या, प्रयागराज, कुशीनगर आदि नगरों में पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है। पर्यटन के क्षेत्र में राज्य सरकार नए-नए प्रयोग कर रही है। पर्यटन को युवा पर्यटन क्लब के माध्यम से युवाओं को जोड़ने पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। राज्य सरकार बौद्ध सर्किट में विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कुशीनगर, संकिसा में पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुदृढ़ कर रही है। कुशीनगर में हाल ही में सम्पन्न हुए इंटरनेशनल बौद्ध कॉनक्लेव में 2,500 से अधिक बौद्ध पर्यटक आये।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की है। इस दिशा में बौद्ध सर्किट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। सारनाथ से कुशीनगर और श्रावस्ती से कपिलवस्तु तक फैला यह बौद्ध आध्यात्मिक गलियारा केवल धार्मिक आस्था का केन्द्र ही नहीं रहा बल्कि यह वैश्विक पर्यटन, निवेश और सांस्कृतिक पुनरोत्थान का एक शक्तिशाली केन्द्र बन कर उभर रहा है। हाल ही में कुशीनगर में सम्पन्न हुए इन्टरनेशनल बौद्ध कॉनक्लेव ने इस दिशा में एक नया अध्याय जोड़ा है, जिसमें इन केन्द्रों पर वैश्विक निवेश के रास्ते खोले है, जो उत्तर प्रदेश के पर्यटन विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट लगातार मजबूत हो रहा है। इसके ऑकड़े स्वयं कहानी कह रहे है। वर्ष 2025 में प्रदेश के 06 प्रमुख बौद्ध स्थलों, सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कौशाम्बी, संकिसा और कपिलवस्तु में 84 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ। बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों के दृष्टि में अब उत्तर प्रदेश की पहचान एक अनिवार्य आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में उभरी है।
इन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं जैसे एक्सप्रेस-वे और हवाई मार्ग से जोड़ा गया है। ताकि विदेशी पर्यटकों के लिए आवागमन को सहज और आकर्षक बनाया जा सके। प्रदेश का बौद्ध सर्किट स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रहा है। होटल उद्योग, परिवहन सेवायें, टूर गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के लिए अवसर पैदा हो रहे है।
इन्टरनेशनल बौद्ध कॉनक्लेव ने कुशीनगर को एक बार फिर विश्व के आध्यात्मिक मानचित्र पर स्थापित किया है। इस कॉनक्लेव में थाइलैण्ड, जापान, म्यांमार, भूटान और नेपाल से आये विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने इसे वास्तविक अर्थों में अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि कॉनक्लेव के दौरान तीन हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए है। बौद्ध सर्किट श्रद्धालुओं के लिए लगातार पसंदीदा स्थल के रूप में उभर रहा है। इससे हॉस्पिटेलिटी सेक्टर को भी ऊर्जा मिल रही है। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के साधन सुलभ हो रहे है। राज्य सरकार श्रद्धालुओं को वैश्विक स्तर की बुनियादी सुविधाएं सुलभ कराने के लिए कटिबद्ध है।
बौद्ध सर्किट के अन्तर्गत आने वाले स्थलों पर विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बौद्ध सर्किट केवल श्रद्धा की धरती ही नहीं, बल्कि निवेश और विकास की उर्वर भूमि है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में धार्मिक पर्यटन के विजन के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था निरन्तर मजबूती की ओर अग्रसर है। पर्यटन विभाग का प्रयास है कि इस सर्किट को मॉडल के रूप में विकसित किया जाये। यह मॉडल बौद्ध सर्किट को नई उचाइयों तक ले जायेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की पहल पर 25 जुलाई 2026 को बुसान शहर में आयोजित यूनेस्को की स्थायी समिति की बैठक में सारनाथ को विरासत की सूची में शामिल किया गया है, जो प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। आगरा का लाल किला, फतेहपुर सीकरी, ताजमहल तथा सारनाथ को यूनेस्को की सूची में जगह मिलने से उ0प्र0 में चार यूनेस्को साइट हो गये हैं। इससे विदेशी सैलानियों की संख्या बढ़ेगी। राज्य सरकार पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार सुविधाओं के सृजन पर जोर दे रही है।
बौद्ध श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बौद्ध सर्किट विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। इंटरनेशनल बौद्ध कॉनक्लेव में कुशीनगर में बौद्ध पर्यटकों के मामले में संभावनाओं की नई राह दिखाई है। पर्यटन विभाग निरंतर पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रयासरत है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय

