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जन्म से महापरिनिर्वाण तक, बुद्ध का जीवन मानवता के लिए प्रेरणा : जयवीर सिंह

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जन्म से महापरिनिर्वाण तक, बुद्ध का जीवन मानवता के लिए प्रेरणा : जयवीर सिंह


‘विश्व शांति के प्रतीक-भगवान बुद्ध’ विषय पर सारनाथ में जुटेंगे देश-विदेश के विद्वान

लखनऊ, 27 अप्रैल (हि.स.)। बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर सारनाथ में दो भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जहां धर्म, संस्कृति और शांति का संदेश देखने को मिलेगा। अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया और इंडो-श्रीलंका इंटरनेशनल बुद्धिस्ट एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में 01 मई को मूलगंध कुटी विहार, सारनाथ में सुबह 'बौद्ध महोत्सव' आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को दी।

मंत्री ने बताया कि धम्म देशना, विपश्यना, परिचर्चा, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन के साथ-साथ ‘विश्व शांति के प्रतीक-भगवान बुद्ध’ विषय पर निबंध और चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। यह आयोजन आस्था और ज्ञान के साथ-साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

इसी दिन शाम को केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के शान्तरक्षित लॉन में बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव संगोष्ठी आयोजित होगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वडछुग दोर्जे नेगी करेंगे, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में हरगोविन्द बौद्ध उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर कई विद्वान वक्ता भगवान बुद्ध के विचारों और उनके वैश्विक महत्व पर अपने विचार रखेंगे।

बुद्ध पूर्णिमा का दिन भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की तीन महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा हुआ है। इसी दिन वैशाख पूर्णिमा को लुंबिनी में 563 ईसा पूर्व उनका जन्म हुआ, बोधगया में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और कुशीनगर में उन्होंने 483 ईसा पूर्व को 80 वर्ष की उम्र में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया यानी जन्म-मृत्यु के चक्र से पूरी तरह मुक्ति पाई। ये तीनों घटनाएं इस दिन को और भी पवित्र बनाती हैं।

उन्होंने बताया भगवान बुद्ध का संदेश आज भी पूरी दुनिया में शांति और करुणा का मार्ग दिखाता है। जापान, चीन, थाईलैंड, श्रीलंका, भूटान जैसे कई देशों में बौद्ध धर्म प्रमुख रूप से माना जाता है, वहीं भारत, नेपाल, अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी सहित कई देशों में भी इसके अनुयायी बड़ी संख्या में हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन