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पांच दिवसीय बालिका शिक्षा प्रशिक्षण वर्ग में व्यक्तित्व विकास और संस्कारों पर मंथन

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पांच दिवसीय बालिका शिक्षा प्रशिक्षण वर्ग में व्यक्तित्व विकास और संस्कारों पर मंथन


-हर विद्यालय में एक बालिका कक्ष अवश्य बनाना चाहिए: उमाशंकर मिश्र

-जन्म से मृत्यु तक बालिका को अनेक भूमिकाएं निभानी होती हैं: विजय उपाध्याय

प्रयागराज, 30 जून (हि.स)। विद्या भारती से संबद्ध काशी प्रांत के रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज राजापुर में प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह के संयोजन एवं क्षेत्रीय बालिका शिक्षा प्रभारी उमाशंकर मिश्र के नेतृत्व में चल रहे पांच दिवसीय बालिका शिक्षा प्रशिक्षण वर्ग के चौथे दिन आज विविध सत्रों में बालिकाओं के व्यवहार, संस्कार और व्यक्तित्व विकास पर गहन चर्चा हुई।विद्यालय के संगीताचार्य एवं मीडिया प्रभारी मनोज गुप्ता ने बताया कि प्रथम सत्र में क्षेत्रीय बालिका शिक्षा प्रभारी उमाशंकर मिश्र ने ‘बालिका शिक्षा का व्यवहार व संस्कार’ विषय पर कहा कि हर विद्यालय में एक बालिका कक्ष बनाया जाए। इस कक्ष में गार्गी, अमला, घोषा, लोपा, रानी दुर्गावती जैसी विदुषी-वीरांगनाओं के चित्र लगाए जाएं और ऐसी पुस्तकें रखी जाएं जो बालिकाओं के लिए प्रेरणादायक हों। उन्होंने कहा, बालिका को पुत्री, बहन, पत्नी, मां और सास के रूप में जीवन निर्वाह करना होता है। हर भूमिका में उसके व्यवहार और संस्कार व्यवस्थित होने चाहिए।

द्वितीय सत्र में क्षेत्रीय शिशु वाटिका प्रमुख विजय उपाध्याय ने ‘बालिका शिक्षा के व्यक्तित्व विकास के विविध आयाम’ पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आचार-विचार, रहन-सहन, खान-पान और वेश-भूषा के माध्यम से बालिकाओं के व्यक्तित्व का विकास किया जा सकता है। जन्म से मृत्यु तक बालिका को अनेक भूमिकाएं निभानी होती हैं। हमें उन्हें सीता, सावित्री जैसा चरित्र देने का प्रयास करना होगा।क्षेत्रीय बालिका प्रमुख निधि द्विवेदी ने बालिका शिक्षा परिषद के 10 परिषदों की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि इनके माध्यम से बालिकाओं में संस्कार रोपे जा सकते हैं। उन्होंने ‘दादी माँ की पाठशाला’ के माध्यम से पौराणिक कथाओं और रीति-रिवाजों का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि यह ज्ञान बालिकाओं के समग्र विकास में अहम भूमिका निभाएगा। डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव ने किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक-मानसिक बदलावों और उनसे बचाव के उपायों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

अंतिम सत्र में प्रान्तीय बालिका शिक्षा प्रमुख बेबिका राय ने ‘भारतीय परम्पराओं में विज्ञान और हमारी जीवन शैली’ विषय पर स्पष्ट किया कि हमारी सनातन संस्कृति के पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज वैज्ञानिक आधार पर टिके हैं। कार्यक्रम का संचालन करुणा सिन्हा ने एवं प्रांतीय बालिका प्रमुख बेबिका राय ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र