पांच तत्वों से बना शरीर मृत्यु के बाद इन्ही तत्वों में हो जाता है विलीन : सुधीर गुप्ता
मुरादाबाद, 03 मई (हि.स.)। अध्यात्म ज्ञान एवं चिंतन संस्था की 190वीं मासिक विचार गोष्ठी का आयोजन रविवार शाम को एमआईटी सभागार मुरादाबाद में किया गया। जिसका विषय “जीवन का मूल मन्त्र” रहा। वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर गुप्ता एडवोकेट ने दृष्य-श्रव्य माध्यम से प्रस्तुति करते हुए बताया कि हमारे मन में यह प्रश्न उठता है कि मैं कौन हूं? क्या यह शरीर ही मैं हूं? तब हम पाते हैं कि यह शरीर जो पांच तत्वों से बना है - अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी एवं आकाश और मृत्यु होने पर यह शरीर इन्हीं पांच तत्वों में विलीन हो जाता है।
श्री गुप्ता एडवोकेट ने आगे बताया कि तब क्या यह शरीर ही मैं हूं? और दूसरा प्रश्न यह भी उठता है कि इस शरीर को जीवित रखने वाला चैतन्य कौन है, कहां से आता है और कहां चला जाता है? इन प्रश्नों का उत्तर ही हमारे ऋषियों द्वारा खोजा गया है। उन्होने बताया है कि हमारे शरीर को जीवित रखने वाला वह चैतन्य तत्व ही ईश्वर है। यह चैतन्य तत्व हमारे शरीर में निवास करता है और समय पूर्ण होने पर उसको त्याग कर अन्य को ग्रहण कर लेता है।
सुधीर गुप्ता ने कहा कि आत्मा का न जन्म होता है और न मृत्यु होती है। जिसे हम मृत्यु समझते हैं वह वास्तव में नए जीवन की ओर कदम है। जो बीत गया उसके लिए दुखी न हों, जो आने वाला है उसके लिए मत सोचोे, जो वर्तमान क्षण है उसका आनन्द लो।
गोष्ठी में वाचस्पति मिश्र, नीरज भूषण, अश्विनी दीक्षित, सूर्य प्रकाश द्विवेदी, सुरेश मल्होत्रा, डॉ सत्य प्रकाश गुप्ता, राकेश राणा, एमएच फर्त्याल, रूप किशोर गुप्ता, किशनपाल सैनी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल

