मृदा स्वास्थ्य बेहतर रखकर ही बढ़ेगा उत्पादन, संतुलित उर्वरक उपयोग जरूरी : डॉ खलील खान
कानपुर, 30 अप्रैल (हि.स.)। फसलों की अधिक उत्पादन क्षमता बनाए रखने के लिए मृदा की सेहत का अच्छा होना अत्यंत आवश्यक है। संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्वों का प्रबंधन करना चाहिए। अनियंत्रित उर्वरक प्रयोग से लागत बढ़ती है और भूमि की उर्वरता घटती जाती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करना जरूरी है। जैविक संसाधनों के उपयोग से टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलता है। यह बातें गुरुवार को डॉ खलील खान ने कही
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी (सीएसए) विश्वविद्यालय कानपुर द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दलीप नगर के तत्वावधान में आज विकास खंड शिवराजपुर के थाथी निवादा में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। वैज्ञानिक डॉ दीपक मिश्रा एवं डॉ राजेश राय ने भी किसानों को मृदा परीक्षण, पोषक तत्व प्रबंधन तथा जैविक खादों के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
वैज्ञानिकों ने हरी खाद, गोबर की खाद तथा अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया और बताया कि इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत कम करने में भी सहायता मिलती है।
कार्यक्रम में किसानों और ग्रामीण महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई तथा अपनी कृषि संबंधी समस्याओं पर वैज्ञानिकों से चर्चा की। आधुनिक तकनीकों को अपनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए किसानों को प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर प्रगतिशील कृषक कमल किशोर कुशवाहा एवं ओमप्रकाश कुशवाहा सहित तीस से अधिक किसान उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

