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बलरामपुर में 121 परीक्षा केंद्रों पर 10 हजार विद्यार्थियों ने दी भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा

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बलरामपुर में 121 परीक्षा केंद्रों पर 10 हजार विद्यार्थियों ने दी भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा


बलरामपुर में 121 परीक्षा केंद्रों पर 10 हजार विद्यार्थियों ने दी भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा


बलरामपुर, 19 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बलरामपुर में शनिवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज, हरिद्वार के तत्वावधान में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का शनिवार काे आयोजन किया गया। गायत्री परिवार के संयोजन में बलरामपुर, तुलसीपुर, उतरौला, गैसड़ी, पचपेड़वा सहित पूरे जनपद में 121 परीक्षा केंद्र बनाए गए, जहां करीब 10 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा में प्रतिभाग किया।

सिटी मांटेसरी पब्लिक स्कूल, मॉडर्न पब्लिक स्कूल, देवीपाटन पूर्व माध्यमिक विद्यालय, तुलसीपुर पब्लिक स्कूल सहित विभिन्न विद्यालयों में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा सुबह 11:00 से 12 बजे तक संपन्न कराई गई। निर्धारित केंद्रों पर विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, सभ्यता, इतिहास और देश की गौरवशाली परंपराओं से संबंधित प्रश्नों का उत्तर दिया।

परीक्षा के जिला संयोजक गुलाबचंद भारती ने बताया कि परीक्षा को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए 250 से अधिक स्वयंसेवकों को लगाया गया था। स्वयंसेवकों ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर पहुंचकर परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, सभ्यता, संस्कार, ऐतिहासिक धरोहर और देश की गौरवशाली परंपराओं से परिचित कराना है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष परीक्षा का आयोजन किया जाता है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ परीक्षा में प्रतिभाग किया। परीक्षा परिणाम जनवरी माह में घोषित किया जाएगा। परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया जाएगा।

परीक्षा के आयोजन में कन्हैयालाल वर्मा, प्रदीप गोयल, गुलाबचंद भारती, सुशील सिंह, रामलखन बैरागी, अशोक बैरागी सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों का विशेष सहयोग रहा। स्वयंसेवकों ने परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाएं संभालते हुए विद्यार्थियों को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित माहौल में परीक्षा दिलाई।

हिन्दुस्थान समाचार/ प्रभाकर कसौधन

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रभाकर कसौधन