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बलिया बलिदान दिवस पर 1942 के वीर सपूतों की याद में खोला गया जेल का फाटक, सेनानियों के परिजनाें का हुआ स्वागत

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बलिया बलिदान दिवस पर 1942 के वीर सपूतों की याद में खोला गया जेल का फाटक, सेनानियों के परिजनाें का हुआ स्वागत


बलिया, 19 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में जनपद बलिया में बलिया बलिदान दिवस के अवसर पर 1942 में अंग्रेजों को खदेड़ने वाले वीर सपूतों को याद किया गया। बुधवार सुबह जिला कारागार का फाटक संकेतिक से खोला गया और शहर के प्रमुख चौराहों से होते हुए प्रभात फेरी यात्रा निकाली गयी। जैसे ही जेल का फाटक खोला गया, परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह के नेतृत्व में अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह व पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने सेनानियों के उत्तराधिकारियों को माला पहना कर स्वागत किया। इसके बाद ऐतिहासिक जेल से निकल कर हजारों लोग शहर के प्रमुख चौराहों कुंवर सिंह, टीडी कालेज होते हुए बापू भवन पहुंचे। इसके बाद दोपहर में गंगा बहुद्देशीय सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया गया।

क्यों मनाया जाता है बलिया बलिदान दिवस

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 19 अगस्त का दिन बलिया के वीर सपूतों द्वारा ब्रिटिश शासन के खिलाफ किए गए ऐतिहासिक संघर्ष और अदम्य साहस की याद दिलाता है। इसी दिन चित्तू पांडेय के नेतृत्व में बलिया के लोगों ने अंग्रेजों को खदेड़कर जिला कारागार का फाटक तोड़ दिया था और खुद को स्वतंत्र घोषित करते हुए समानांतर सरकार बनाई थी। हजारों की संख्या में बलिया की जनता ने जिला कारागार पर धावा बोलकर सेनानियों को मुक्त कराया और अंग्रेजी हुकूमत को यहां से उखाड़ फेंका। शहर के गुदरी बाजार में ब्रिटिश पुलिस से मुकाबला करते हुए कई हुतात्माओं ने शहादत दी थी। यह दिन देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति और उनके अदम्य साहस को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है ।

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हिन्दुस्थान समाचार / नीतू तिवारी