हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही बेटियाँ : संदीप सिंह
नारी शक्ति के बिना संसार की कल्पना असंभव : संदीप सिंह
लखनऊ,08 मार्च (हि.स.)। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर रविवार को लखनऊ में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से 'प्रगति: आत्मसम्मान से समानता तक–बाल उत्सव' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बालिकाओं के आत्मसम्मान, समानता और सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने किया। इस दौरान बच्चों द्वारा तैयार की गई कॉमिक पुस्तकों, मीना मंच की पूर्व बालिकाओं की प्रेरणादायक सफलता कहानियों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों से संबंधित केस स्टडी बुकलेट का विमोचन भी किया गया।
इस अवसर पर मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि नारी शक्ति के बिना संसार की कल्पना असंभव है और आज बेटियां शिक्षा,खेल,विज्ञान और प्रशासन सहित हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति के 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता' श्लोक का भी उल्लेख किया, जिसका अर्थ है कि जहां नारियों का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है।
मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बालिकाओं की शिक्षा,सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से 12वीं कक्षा तक उच्चीकृत किया जा रहा है और 826 विकास खंडों में नए विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
मंत्री संदीप सिंह ने छात्रों को डीबीटी के माध्यम से जूते, मोजे, स्कूल बैग, कॉपी और किताबों के लिए 1200 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 3 करोड़ 19 लाख से अधिक बच्चे कक्षा 1 से 8 तक पढ़ रहे हैं, जिनमें 1 करोड़ 51 लाख से अधिक बालिकाएं हैं, जो बालिकाओं की शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।
अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि पिछले दो दशकों में उत्तर प्रदेश में बालिकाओं की शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने एसटीईएम विषयों में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने मीना मंच और अन्य शैक्षिक पहलों को बढ़ावा देने के लिए बालिकाओं की प्रशंसा की। उन्होंने बालिकाओं को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने,तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने और अनुशासन के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
यूनिसेफ उत्तर प्रदेश के प्रमुख जकारी ऐडम ने कहा कि 'प्रगति' कार्यक्रम बालिकाओं की क्षमता,रचनात्मकता और नेतृत्व का उत्सव है। उन्होंने समावेशी और लैंगिक संवेदनशील शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के साथ काम करने की यूनिसेफ की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में छात्राओं ने सरस्वती वंदना, फ्लैश मॉब, नुक्कड़ नाटक, नृत्य, योग प्रदर्शन और माइम जैसी विभिन्न प्रस्तुतियां दीं, जिनके माध्यम से महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया गया। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 20 प्रतिभाशाली बालिकाओं और पूर्व छात्राओं को सम्मानित किया गया। राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लगभग 850 बच्चे, शिक्षक और अभिभावक शामिल हुए।
कार्यक्रम स्थल पर 23 विषयगत स्टॉल लगाए गए, जिनमें शिक्षण-अधिगम सामग्री, रचनात्मक गतिविधियां, सामाजिक-भावनात्मक अधिगम, नेतृत्व विकास, अभिभावक सहभागिता और करियर परामर्श से संबंधित प्रदर्शनियां प्रस्तुत की गईं।
उल्लेखनीय है कि 'प्रगति: आत्मसम्मान से समानता तक–बाल उत्सव' की शुरुआत 2024 में एक पायलट परियोजना के रूप में हुई और 2025-26 में इसे प्रदेश के सभी 75 जनपदों में विस्तारित किया गया।
यह आयोजन तीन चरणों में संपन्न हुआ—जनपद स्तर, मंडल स्तर और राज्य स्तर पर। दोपहर के सत्र में अभिभावकों का सम्मान, गीत प्रस्तुति, पूर्व छात्र-छात्राओं के साथ संवाद और बच्चों द्वारा अपने अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

