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अयोध्या से विश्वव्यापी नारीयुग स्थापना का आह्वान, 151 विद्यार्थियों ने ग्रहण की गायत्री मंत्र की दीक्षा

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अयोध्या से विश्वव्यापी नारीयुग स्थापना का आह्वान, 151 विद्यार्थियों ने ग्रहण की गायत्री मंत्र की दीक्षा


अयोध्या, 30 अक्टूबर (हि.स.)। वंदनीय माताजी शताब्दी समारोह एवं श्रीराम गायत्री 251 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के अंतर्गत अयोध्या धाम के छोटी छावनी धर्म मंडपम में बाल संस्कार, युवा चेतना, महिला नेतृत्व और विश्वशांति का संदेश दिया गया। ग्लोबल गायत्री परिवार शिकागो की संस्थापक एवं संयोजक महात्मा कुसुम माताजी के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में छपरा के नारायणपुर स्थित ब्लूमिंग बड्स एकेडमी के 151 विद्यार्थियों ने गायत्री मंत्र एवं गुरुदीक्षा ग्रहण की। विद्यार्थियों ने प्रतिदिन 24 बार गायत्री मंत्र जप करने का संकल्प लिया। करीब 500 विद्यार्थियों वाले विद्यालय ने भी इस पहल को सहयोग देने की सहमति जताई।

151 विद्यार्थियों ने लिया नियमित मंत्र जप का संकल्प

महात्मा कुसुम माताजी ने विद्यार्थियों को गायत्री मंत्र का सरल अर्थ और जीवन में उसका महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि गायत्री मंत्र बुद्धि, विवेक और सद्विचारों को श्रेष्ठ दिशा देने की प्रार्थना है। नियमित मंत्र जप और आत्मचिंतन से एकाग्रता, अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बच्चों से अच्छे विद्यार्थी बनने के साथ अच्छे इंसान बनने, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करने, नारी गरिमा का आदर करने तथा प्रकृति की रक्षा करने का आह्वान किया। गुरुदीक्षा को उन्होंने आत्मअनुशासन और श्रेष्ठ कर्मों की दिशा में स्वेच्छा से उठाया गया आध्यात्मिक कदम बताया।

300 से अधिक स्मारिकाओं का किया वितरण

कार्यक्रम में वंदनीय माताजी की स्मृति में प्रकाशित स्मारिका 'नारीयुग की अधिष्ठात्री—वंदनीय माताजी भगवती देवी शर्मा' का सामूहिक विमोचन प्रधानाचार्य विजय पांडेय ने किया। आयोजक दल 300 से अधिक स्मारिकाएं लेकर पहुंचा था, जिन्हें अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और सहयोगियों को वितरित किया गया। विमोचन के दौरान 50 से अधिक गणमान्य व्यक्ति मंच पर मौजूद रहे। सेंट जोसेफ विद्यालय के प्रधानाचार्य शिवाकर दुबे के नेतृत्व में विद्यार्थी और शिक्षक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

महिला नेतृत्व और नारी जागरण पर जोर

जालंधर से आईं नामधारी समाज की महिला प्रतिनिधि एवं प्रिंसिपल राजपाल ने नारी सम्मान, नेतृत्व और सामाजिक भागीदारी पर विचार रखे। उन्होंने यूनिवर्सल नारीयुग अभियान के उद्देश्यों का समर्थन करते हुए सहयोग का भरोसा दिया। महात्मा कुसुम माताजी ने कहा कि यह अभियान किसी देश, जाति, धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, नेतृत्व और निर्णय लेने के अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि नारी और पुरुष के परस्पर सहयोग से ही संतुलित और मानवीय समाज का निर्माण संभव है।

युवा स्वयंसेवकों ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी

कार्यक्रम के संचालन और व्यवस्थाओं में विशाल, संदीप, प्रेम, अनिल, सुनील आर्य और नेहा शर्मा सहित युवा स्वयंसेवकों ने योगदान दिया। आयुष्मान भारत ने मंच पर उपस्थित अतिथियों और सहयोगियों का परिचय कराया। श्री रामराज ने बच्चों और युवाओं को शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास और सेवा भावना अपनाने के लिए प्रेरित किया। बाल कलाकार सुनील आर्य और नेहा शर्मा की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उत्साह भरा। संतों के मंत्रोच्चार, भजन और आध्यात्मिक प्रस्तुतियों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। शिक्षकों, अतिथियों और सहयोगियों को सम्मानित भी किया गया।

नारी सम्मान से विश्वशांति तक का संदेश

महात्मा कुसुम माताजी ने कहा कि नारीयुग स्थापना का अर्थ केवल नारी की प्रशंसा करना नहीं, बल्कि परिवार, शिक्षा, समाज और संस्थाओं में उसे समान सम्मान तथा नेतृत्व का अवसर देना है। उन्होंने वंदनीय माताजी भगवती देवी शर्मा के जीवन को नारी जागरण और समाज निर्माण की प्रेरणा बताया। अभियान के प्रमुख आधारों में नारी सम्मान, शिक्षा, नेतृत्व, बाल एवं युवा संस्कार, मानवता और विश्वशांति को शामिल किया गया हैं।कार्यक्रम के समापन पर महात्मा कुसुम माताजी ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया। आयोजन का संदेश रहा—ज्ञान से जागरण, जागरण से युग परिवर्तन और नारी जागरण से नारीयुग स्थापना।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय