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चलाे देखि आएं सिया रघुवीर झुलनवा झूल रहे...

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चलाे देखि आएं सिया रघुवीर झुलनवा झूल रहे...


जानकी रमन झूलें सावन सरस कुंज, झोंकनि झुकावत पवनपुत्र झूला री

अयोध्या, 27 अगस्त (हि.स.)। रामनगरी की प्राचीनतम पीठ लक्ष्मण किला में श्रावण झूलनाेत्सव का उल्लास देखते हुए बन रहा है। जहां श्रावण में झूलन महोत्सव अपने चरम पर पहुंच चुका है। महाेत्सव काे लक्ष्मण किला पीठाधीश्वर महंत मैथिली रमण शरण महाराज अपना सानिध्य प्रदान कर रहे हैं। मठ में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन तक झूलनाेत्सव का कार्यक्रम चलेगा। उसके बाद झूलन महोत्सव का समापन हाे जायेगा।

मंदिर में विराजमान भगवान काे नित्य पूजन-अर्चन, आरती पश्चात झूले पर पधरा झूला झुलाया जा रहा है। जिसका सिलसिला मठ में देररात्रि तक चलता है। भगवान के दिव्य झूलन झांकी का दर्शन कर भक्तजन अपना जीवन धन्य बना रहे हैं। कलाकारों द्वारा चलाे देखि आएं सिया रघुवीर झुलनवा झूल रहे..। झूलन में आज सज-धजकर युगल सरकार बैठे हैं..। झूला झूलें सिया राम झुलावें सखियां...आदि झूलन गीताें-पदाें से झूलनाेत्सव की महफिल सजाई जा रही है। इससे साधु-संत से लेकर भक्तजन मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। रंग-बिरंगी विद्युत लाइटें महाेत्सव में चार-चांद लगा रही हैं। आश्रम में भक्तजनों काे झूलनोत्सव की एक अद्भुत आभा देखने को मिल रही है। सभी कलाकाराें काे न्याैछावर भी भेंट किया जा रहा है।

लक्ष्मण किला पीठाधीश्वर महंत मैथिली रमण शरण महाराज ने बताया कि युगल सरकार के झूलन झांकी का दर्शन करने से अपार पुण्य की प्राप्ति हाेती है। यह झूलनोत्सव की परंपरा त्रेतायुग से चली आ रही है। जिसका हम सब आज भी निर्वाहन कर रहे हैं। भगवान के झूलन झांकी का दर्शन करने से व्यक्ति हमेशा के लिए आवागमन से मुक्त हो जाता है। उसे चाैरासी लाख याेनियाें से मुक्ति मिल जाती है। अर्थात सांसारिक माताओं की गाेद में उसे कभी नही झूलना पड़ता है।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय