अयोध्या के दसवें दीपोत्सव में पांच देशों की रामलीला का रंग
-दक्षिण अफ्रीका से थाईलैंड तक के कलाकार सजाएंगे रामनगरी
-12 मंचों पर 2500 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
-अंतरराष्ट्रीय लोककलाओं से सजेगा दीपोत्सव का दशक
अयोध्या, 31 अक्टूबर (हि.स.)। रामनगरी का दसवां दीपोत्सव इस बार अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आएगा। दीपोत्सव में पांच देशों के कलाकार अपनी-अपनी परंपराओं और शैली में रामलीला का मंचन कर भगवान श्रीराम की कथा को वैश्विक मंच प्रदान करेंगे। दक्षिण अफ्रीका की दो टीमों के साथ श्रीलंका, नेपाल, लाओस और थाईलैंड के कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। इसके अलावा फिलीपींस, थाईलैंड और रूस के कलाकारों की भागीदारी को लेकर भी तैयारी चल रही है। देश-विदेश के करीब 2500 कलाकार छह लघु, चार मध्यम और दो दीर्घ मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। वहीं, असम, बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केरल की रामचरित्र एवं रामकथा आधारित प्रस्तुतियां भी दीपोत्सव की सांस्कृतिक विविधता को विस्तार देंगी।
विदेशी रामलीला में दिखेगी अलग-अलग देशों की संस्कृति
दीपोत्सव को केवल दीप प्रज्ज्वलन और धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखकर इसे वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में विकसित करने की तैयारी है। विभिन्न देशों की रामलीला शैलियों के माध्यम से दर्शकों को यह देखने का अवसर मिलेगा कि अलग-अलग भाषाओं, वेशभूषाओं और लोक परंपराओं में भगवान श्रीराम की कथा किस तरह प्रस्तुत की जाती है। दक्षिण अफ्रीका की दो टीमों की भागीदारी विशेष आकर्षण होगी। श्रीलंका, नेपाल, लाओस और थाईलैंड के कलाकार भी अपनी सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप रामलीला का मंचन करेंगे। फिलीपींस, थाईलैंड और रूस के कलाकारों की प्रस्तुतियों को लेकर भी प्रक्रिया चल रही हैं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से अयोध्या में विभिन्न देशों की कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की झलक एक साथ देखने को मिलेगी।
12 मंचों पर 2500 कलाकारों की प्रस्तुतियां
संस्कृति विभाग की ओर से छह लघु, चार मध्यम और दो दीर्घ मंच तैयार कराए जाने की योजना है। इन मंचों पर लगभग 2500 भारतीय और विदेशी कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। आयोजन में पांच राज्यों की भागीदारी भी रहेगी। असम, बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केरल के कलाकार श्री रामचरित्र एवं श्रीराम कथा से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इस तरह दीपोत्सव में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की लोक परंपराओं के साथ अंतरराष्ट्रीय रामलीला का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि देसी-विदेशी कलाकारों की भागीदारी दीपोत्सव को और आकर्षक बनाएगी। पांच देशों की रामलीला और विभिन्न राज्यों की रामकथा आधारित प्रस्तुतियां आयोजन को सांस्कृतिक विविधता का मंच प्रदान करेंगी। इससे स्थानीय कलाकारों और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों को भी अवसर मिलेगा। विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों से अयोध्या की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि लगभग 2500 कलाकारों की सहभागिता से रामनगरी में विविध संस्कृतियों का जीवंत स्वरूप दिखाई देगा।
धार्मिक के साथ सांस्कृतिक पर्यटन का भी केंद्र बनी अयोध्या
राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर रही है। ऐसे में दीपोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने की यह पहल रामकथा की वैश्विक स्वीकार्यता को सामने लाने का माध्यम बनेगी। विभिन्न देशों की रामलीला के जरिए भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा और जीवन दर्शन को अलग-अलग सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में प्रस्तुत किया जाएगा। दीपोत्सव के माध्यम से अयोध्या को विश्व के सांस्कृतिक मानचित्र पर और व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय

