भारतीय शिक्षा ज्ञान, अनुशासन और जीवन-मूल्यों पर आधारित : प्रो. विजेंद्र सिंह
- भारतीय शिक्षण मंडल का 57 वां स्थापना दिवस मनाया गया
अयोध्या, 12 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय शिक्षण मंडल अवध प्रान्त का 57वां स्थापना दिवस रविवार को एक मैरिज लॉन मसौधा में मनाया गया।
इस अवसर पर अवध विश्विद्यालय के कुलपति कर्नल प्रो. विजेन्द्र सिंह ने रामायण व महाभारत के प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि नैतिक व चारित्रिक निर्माण शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है। हमें विश्व का नेतृत्व करने वाले विकसित भारत का निर्माण करना है। भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमें बहुआयामी, ज्ञान, नैतिक मूल्यों और चारित्रिक गुणों से युक्त सकारात्मक युवा नेतृत्व तैयार करने की आवश्यकता है।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रो. बीके पांडेय ने संस्कार पोषित शिक्षा को विद्या एवं ज्ञान के रूप में विद्यार्थी जीवन के लिए सार्थक बताया। कहा,
शिक्षा-देशभक्ति, धर्म के अनुसार आचरण करने के लिए, स्वालम्बन के लिए, स्वाभिमान के लिए होनी चाहिए ना कि केवल धनोपार्जन के लिए I शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य चरित्र निर्माण एवं राष्ट निर्माण होना चाहिए, शिक्षा में जीवन मूल्यों का समावेश होना चाहिए I
उन्होंने भारतीय शिक्षण मंडल के द्वारा किए जाने वाले कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल शिक्षा में भारतीयता लाने के लिए, समता मूलक सामाजिक परिवर्तन करने के लिए एवं भारत माता को विश्व गुरु के आसन पर प्रतिष्ठित करने के लिए जो कार्य कर रहा है वह अत्यंत सराहनीय एवं अनुकरणीय है।
श्री रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सदस्य डॉ अनिल मिश्रा ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में अनुशासन चरित्र निर्माण का सर्वोत्तम साधन है। शिक्षा के पश्चिमीकरण के स्थान पर उसमें भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन की आवश्यकता पर बल देते हुए भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा किए जा रहे प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा में हमारी भारतीयता झलकनी चाहिए। शिक्षा वो है जो वास्तविक रूप से आपको सक्षम एवं सशक्त बनाये। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सबसे अधिक नौजवानों का देश है एवं हमें सशक्त भारत के निर्माण के लिए ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है जो हमारे नौजवानों में आंतरिक दृढ़ता एवं बाह्य कौशल का विकास करे। जिससे कि भारत 1947 विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया के सम्मुख खड़ा हो सके I
अखिल भारतीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य दिलीप सिंह ने कहा कि शिक्षा राष्ट्रीय पुनरोत्थान एवं स्वावलम्बन के एक मजबूत आधार हैं। प्रान्त अध्यक्ष कहा कि विद्या वही है जो बंधन से मुक्त करे और सच्चे मार्ग की ओर ले जाए। स्थापना वर्ष 1969 से लेकर वर्तमान समय तक के कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने भारतीय शिक्षण मंडल की विभिन्न गतिविधियों, कार्य विभाग, वार्षिक उत्सव एवं संघ शताब्दी वर्ष में मंडल के द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम में एकल गीत विशाल मिश्रा एवं धन्यवाद प्रस्ताव प्रान्त मंत्री धर्मेन्द्र कुमार पाठक द्वारा दिया गया I कार्यक्रम का संचालन डॉ उपेंद्रमणि त्रिपाठी ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय

