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संस्कारयुक्त शिक्षा से ही विकसित भारत का निर्माण, युवा नशे से रहें दूर : आनंदीबेन पटेल

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संस्कारयुक्त शिक्षा से ही विकसित भारत का निर्माण, युवा नशे से रहें दूर : आनंदीबेन पटेल


अयोध्या, 12 अगस्त (हि.स.)। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31वां दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने बुधवार को विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, स्वाभिमान और सामाजिक जिम्मेदारी का संकल्प लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश गंगा, यमुना और सरस्वती की पावन भूमि है। यह भगवान श्रीराम, शिव और श्रीकृष्ण की आराधना एवं आध्यात्मिक चेतना की भूमि है। अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की नगरी है और यहां से शिक्षा प्राप्त कर निकलने वाले विद्यार्थियों का दायित्व है कि वे अपने गौरवशाली अतीत को स्मरण करते हुए उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ें। इसके साथ ही युवा संकल्प लें कि नशा से दूर रहेंगे तभी संस्कारयुक्त शिक्षा से विकसित भारत का निर्माण हाेगा।

राज्यपाल ने कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया ने आध्यात्मिक एवं धार्मिक चेतना के साथ स्वाभिमान और भारतीय अस्मिता को महत्व दिया। उन्होंने धर्म को धर्मांतरण से अलग बताते हुए भारतीय संस्कृति और परंपरा के मूल तत्वों को समझने की आवश्यकता पर बल दिया। कुलाधिपति ने कहा कि व्यक्ति ईश्वर को माने अथवा न माने, लेकिन भारतीय समाज की एकता और अखंडता के महत्व से इनकार नहीं कर सकता। विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने के बाद यह विचार करना चाहिए कि वे कौन-से संस्कार लेकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देंगे। उन्होंने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सफलता में शिक्षकों और अभिभावकों का महत्वपूर्ण योगदान है। माता-पिता और गुरुजनों के विश्वास एवं सतत प्रयासों ने विद्यार्थियों को इस मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी है।दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति ने 104 मेधावी छात्र-छात्राओं को 120 स्वर्ण पदक प्रदान किए। इसके साथ ही उन्होंने स्नातक एवं परास्नातक की 1,66,055 उपाधियों एवं अंकपत्रों को डिजिलॉकर में समावेशित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय