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भारतीय विद्वानों ने पश्चिमी विद्वानों के मिथक को तोड़ा : प्रो. अनुराधा अग्रवाल

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भारतीय विद्वानों ने पश्चिमी विद्वानों के मिथक को तोड़ा : प्रो. अनुराधा अग्रवाल


--इविवि में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की ओर से भारतीय ज्ञान परम्परा पर छह दिवसीय कार्यक्रम का समापन

प्रयागराज, 20 मार्च (हि.स)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परम्परा पर हुए छह दिवसीय कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हो गया। कार्यक्रम यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय के आईकेएस प्रभाग के सहयोग से किया गया है। समापन समारोह में कला संकाय की डीन प्रो. अनुराधा अग्रवाल मुख्य अतिथि रहीं।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. अनुराधा अग्रवाल ने कहा कि एक समय था जब पश्चिमी विद्वानों ने यह मिथक बनाया कि प्राचीन भारतीय विद्वान मुख्य रूप से आध्यात्मिकता में रुचि रखते थे और राजनीतिक विचार के स्वतंत्र स्कूल विकसित नहीं हुए थे। उन्होंने कहा कि डॉ. बेनी प्रसाद जैसे प्रख्यात विद्वानों ने इस मिथक को चुनौती दी और इसे तोड़ा।

एमएमटीटीसी इविवि के निदेशक प्रो. प्रकाश जोशी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा कार्यक्रम एक यज्ञ है। उन्होंने गंगा और भारतीयों की समृद्ध परम्पराओं का भी जिक्र किया। उप निदेशक और समन्वयक प्रो. संदीप आनंद ने सभी सत्रों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्पराओं में कार्यक्रम और अनुसंधान भारत में चल रहे ज्ञान पुनर्जागरण के हिस्से हैं। आईकेएस प्रभाग, शिक्षा मंत्रालय से डॉ. रुचिका सिंह ने भारतीय मानस को उपनिवेशवाद से मुक्ति पर जोर दिया और आईकेएस की नई पहलों का विवरण प्रस्तुत किया। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, प्रयागराज डॉ. अपराजिता पांडेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्पराओं के बारे में गढ़ी गई झूठी कहानियों और रूढ़िवादिता को तोड़ने की जरूरत है।

इविवि की पीआरओ प्रो जया कपूर ने बताया कि कार्यक्रम में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के इलाहाबाद परिसर की ओर से भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र