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अटारी कानपुर का 18वां स्थापना दिवस, फसल अवशेष प्रबंधन पर मंथन : के. विजयेंद्र पांडियन

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अटारी कानपुर का 18वां स्थापना दिवस, फसल अवशेष प्रबंधन पर मंथन : के. विजयेंद्र पांडियन


कानपुर, 19 मार्च (हि.स.)। बढ़ती हुई जनसंख्या के बीच कृषि का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और किसानों की आय बढ़ाने में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका अहम हो गई है। आधुनिक तकनीकों, विशेषकर एआई के उपयोग से कृषि को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। फसल अवशेष प्रबंधन जैसे विषयों पर जागरूकता समय की जरूरत है। यह बातें गुरुवार को मंडलायुक्त कानपुर के. विजयेंद्र पांडियन ने कहीं।

भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), जोन तृतीय, कानपुर में 18वां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर ‘फसल अवशेष प्रबंधन: सतत समाधान’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

मुख्य अतिथि राजकुमारी रत्ना सिंह ने ग्रामीण युवाओं को कृषि व्यवसाय की ओर आकर्षित करने पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं की भागीदारी से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होंगी। वहीं पूर्व उप महानिदेशक भाकृअनुप डॉ. यू.एस. गौतम ने फल और दुग्ध उत्पाद भंडारण को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई।

सहायक महानिदेशक डॉ. आर.आर. बर्मन वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में जुड़े और उन्होंने संस्थान की आगामी परियोजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान डॉ. एम.पी. चचारकर, डॉ. रवि गोपाल सिंह और डॉ. अंजनी कुमार सिंह ने भी अपने विचार रखे।

संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेन्द्र सिंह ने स्वागत भाषण में संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अटारी कानपुर 89 कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से प्रदेश में कृषि विकास को गति दे रहा है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने की समस्या को समाप्त करना है, जिसमें 23 कृषि विज्ञान केंद्र सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

इस अवसर पर संस्थान के प्रकाशनों का विमोचन किया गया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषि विज्ञान केंद्रों, एफपीओ, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीति यादव ने किया, जबकि अंत में डॉ. अजय कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप