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कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने स्मार्ट प्री-पेड व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी को लिखा पत्र

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कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने स्मार्ट प्री-पेड व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी को लिखा पत्र


लखनऊ, 31 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मंगलवार काे प्रदेश में स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।

अजय राय ने पत्र में स्मार्ट प्री पेड व्यवस्था की विफलता, उपभोक्ता हितों के उल्लंघन एवं विद्युत कंपनियों के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित कराया।

उन्होंने लिखा है कि आपके संज्ञान में अवश्य होगा कि प्रदेश में स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था के क्रियान्वयन के पश्चात जो परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं, वह न केवल अत्यंत चिंताजनक हैं, बल्कि व्यापक जनअसंतोष में उभार एवं प्रशासनिक विफलता का संकेत भी देती हैं।कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में अब तक 74,48,263 स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 69,64,944 उपभोक्ताओं के मीटर बिना पूर्व सूचना के प्री-पेड मोड में परिवर्तित कर दिए गए जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है। ऑटोमेटिक डिस्कनेक्शन अभियान के अंतर्गत 5,79,066 उपभोक्ताओं के कनेक्शन स्वतः काट दिए गए, जिससे हजारों परिवारों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के अंधकार में रहने को विवश होना पड़ रहा है।

व्यापक स्तर पर यह शिकायत सामने आई है कि बिल जमा करने अथवा बैलेंस उपलब्ध होने के पश्चात भी बिजली आपूर्ति घंटों अथवा दिनों तक बहाल नहीं हो रही है, जिससे यह सिद्ध होता है कि वर्तमान प्रणाली तकनीकी रूप से सक्षम नहीं है। उपभोक्ताओं द्वारा यह भी शिकायत की जा रही है कि स्मार्ट मीटर के कारण बिजली बिलों में असामान्य वृद्धि हो रही है, जिससे मीटर की सटीकता एवं पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं। इस समूची व्यवस्था के समानांतर, विद्युत विभाग में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है, जिससे विद्युत आपूर्ति एवं रख-रखाव प्रणाली के और अधिक प्रभावित होने की आशंका है।

उपरोक्त परिस्थितियाँ यह दर्शाती हैं कि वर्तमान स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था न तो तकनीकी रूप से परिपक्व है और न ही उपभोक्ता हितों की रक्षा करने में सक्षम है। इसके बावजूद इसे व्यापक स्तर पर लागू करना जनहित के विपरीत एवं प्रशासनिक दृष्टि से अनुचित प्रतीत होता है। इस संदर्भ में यह भी उल्लेखनीय है कि प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे यह आशंका उत्पन्न होती है कि वर्तमान अव्यवस्था को एक आधार बनाकर सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को निजी हाथों में सौंपने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस इस एक पक्षीय निर्णय के तहत निजीकरण के विरुद्ध अपना मत स्पष्ट कर चुकी है।

अजय राय ने ऐसे मामलों को देख कर सुधार कराए जाने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा