एआई अब विज्ञापन और जनसंपर्क की अनिवार्य जरूरत : प्रो. मनुकोण्डा रवीन्द्र नाथ
कानपुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। आज का दौर पूरी तरह डिजिटल और डेटा आधारित हो चुका है, जहां तकनीक की समझ सफलता की कुंजी है। विज्ञापन और जनसंपर्क में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुकी है। छात्रों को नई तकनीकों को अपनाकर अपने कौशल को मजबूत करना होगा। तकनीक का उपयोग समाज के हित और पारदर्शिता के लिए होना चाहिए, न कि भ्रामक सूचनाएं फैलाने के लिए। भविष्य उन्हीं का है जो तकनीक के साथ खुद को ढाल लेते हैं। यह बातें शनिवार को प्रो. मनुकोण्डा रवीन्द्र नाथ ने कही।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में ‘विज्ञापन एवं जनसंपर्क में कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के मुख्य वक्ता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रो. मनुकोण्डा रवीन्द्र नाथ रहे। उन्होंने बताया कि अब जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता टूल्स की मदद से कुछ ही मिनटों में विज्ञापन सामग्री, ग्राफिक्स और वीडियो तैयार किए जा रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र में तेजी से बदलाव आया है।उन्होंने छात्रों को नई तकनीकों को अपनाने और उन्हें अपने कौशल का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही तकनीक के जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल समाज के हित और पारदर्शिता के लिए होना चाहिए। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि जनसंपर्क और विज्ञापन के क्षेत्र में रोजगार के कई अवसर हैं। कार्यक्रम का संचालन मिताली ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ओम शंकर गुप्ता ने दिया। कार्यक्रम में डॉ. हरिओम कुमार, डॉ. जीतेंद्र डबराल, डॉ. योगेंद्र पांडेय, डॉ. रश्मि गौतम सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

