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बांदा कृषि विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में 250 विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां, 18 मेधावी पदकाें से हुए सम्मानित

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बांदा कृषि विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में 250 विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां, 18 मेधावी पदकाें से हुए सम्मानित


बांदा, 12 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में बुधवार काे आयाेजित बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के 12 वें दीक्षांत समारोह में 250 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि 18 मेधावियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। बीएससी (ऑनर्स) कृषि की छात्रा अनुष्का सिंह को चांसलर स्वर्ण पदक मिला। समारोह में बीएससी (ऑनर्स) कृषि की 105, उद्यान की 62, वानिकी की 18, एमएससी कृषि की 21, उद्यान की 11, वानिकी की पांच, बीएससी (ऑनर्स) गृहविज्ञान की दो तथा पीएचडी कृषि की 19 और उद्यान की सात उपाधियां प्रदान की गईं।

बुधवार काे आयाेजित समारोह की शुरुआत शोभायात्रा के आगमन और राष्ट्रगीत से हुई। कुलपति प्रो. एस.वी.एस. राजू ने विश्वविद्यालय की वार्षिक उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के 110 स्नातक एवं परास्नातक विद्यार्थियों को रोजगार मिला, जबकि 18 विद्यार्थियों ने देश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लिया। आईआईआरएफ 2025-26 में विश्वविद्यालय को देश में 39वां स्थान मिला। शोध के क्षेत्र में 19.69 करोड़ रुपये की 14 परियोजनाएं प्राप्त हुईं तथा नौ पेटेंट और एक कॉपीराइट हासिल किया गया। बुंदेलखंड में शुष्क खेती को बढ़ावा देने के लिए आईसीआरआईसैट, हैदराबाद के साथ शोध समझौता भी किया गया।

उन्हाेंने आगे बताया कि कृषि प्रसार के क्षेत्र में करीब तीन हजार हेक्टेयर में दलहनी और तिलहनी फसलों के प्रदर्शन लगाए गए। कृषि विज्ञान केंद्रों के 557 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 12,533 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। सीड हब परियोजना के तहत 741.79 क्विंटल बीज का उत्पादन कर 77.18 लाख रुपये की आय अर्जित की गई। विश्वविद्यालय में 40 करोड़ रुपये की लागत से ऑडिटोरियम का निर्माण भी प्रगति पर है।

पदक विजेताओं में चांसलर स्वर्ण पदक अनुष्का सिंह को मिला। वाइस चांसलर स्वर्ण पदक निर्भय सिंह, दीपल जोशी, शिवानी, मुस्कान गुप्ता, साक्षी पटेल और रत्नेश सिंह ने हासिल किया। वाइस चांसलर रजत पदक दिव्यांशी गुप्ता, अर्पित मौर्य, हर्षदीप रस्तोगी, ख्याति सिंह, ऋद्धिधिमा शुक्ला और उज्जवल शर्मा को मिला। कांस्य पदक प्रनव मिश्रा, प्रांजलि गुप्ता, संगम तिवारी, ओशिका जैन और निहाल कुमार गुप्ता ने प्राप्त किया। इसके अलावा 50 मेधावी विद्यार्थियों को मेरिट प्रमाणपत्र दिए गए।

समारोह में तीन शिक्षकों प्रो. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. सी.एम. सिंह और डॉ. अरविंद कुमार गुप्ता को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया। पांच गांवों के विद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच आयोजित कहानी कथन, चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। कुलाधिपति की पहल के तहत जिले के 100 आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरित की गईं। उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षकों की पुस्तकों का विमोचन, दीक्षोत्सव की लघु फिल्म का प्रदर्शन तथा स्कूली बच्चों की पर्यावरण गीत और देशभक्ति व लोकनृत्य की प्रस्तुतियां भी हुईं।

समाराेह के मुख्य अतिथि डॉ. वी.वी. सदामते ने विद्यार्थियों से आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रयोगशाला से खेत तक पहुंचाने और किसानों की समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध, नवाचार और ग्रामीण परिवर्तन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम. बोबड़े ने कहा कि देश की कृषि उन्नति में युवा कृषि स्नातकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों से अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग देश की कृषि व्यवस्था और किसानों की प्रगति के लिए करने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कृषि स्नातक छोटे एवं सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों को पहुंचाने में ज्ञान सेतु की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसका श्रेय देश के करोड़ों किसानों और वैज्ञानिकों की प्रतिबद्धता को जाता है। बोबडे ने बुंदेलखंड की कृषि संबंधी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए युवा शोधार्थियों से इन समस्याओं को केवल चुनौती के रूप में न देखकर नवाचार और अनुसंधान के व्यापक अवसर के तौर पर देखने का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह