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गोरखपुर : अभाविप ने आरोप लगाने वालों को दी चुनौती, कहा—बिना प्रमाण आरोप लगाकर विश्वविद्यालय का माहौल न बिगाड़ें

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गोरखपुर : अभाविप ने आरोप लगाने वालों को दी चुनौती, कहा—बिना प्रमाण आरोप लगाकर विश्वविद्यालय का माहौल न बिगाड़ें


गोरखपुर, 24 सितंबर (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) एवं कार्यकर्ताओं के विरुद्ध लगाये जा रहे निराधार आरोपाें पर अपना पक्ष रखने के लिये गुरुवार काे अभाविप प्रांत कार्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रांत सह मंत्री निखिल गुप्ता ने कहा कि विगत कई दिनों से कुछ तथाकथित छात्रनेता आज विद्यार्थी परिषद के उन कार्यकर्ताओं पर ही निराधार आरोप लगा रहे हैं, जो लगातार विद्यार्थी हितों के लिए काम कर रहे हैं। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता अपनी शिक्षा के साथ-साथ विश्वविद्यालय परिसर और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर प्रयास करते हैं। विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाना, उनके हितों के लिए आवाज उठाना और परिसर में स्वस्थ एवं शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना परिषद की प्राथमिकताओं में रहा है। इसके बावजूद कुछ लोग लगातार विद्यार्थी परिषद और उसके कार्यकर्ताओं की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।

निखिल गुप्ता ने कहा कि आज कुछ लोग पूछ रहे हैं कि विद्यार्थी परिषद ने आखिर किया क्या है? शायद वे यह भूल गए हैं कि लगभग तीन वर्ष पहले जब विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों पर फीस वृद्धि का बोझ डाला गया था, तब विद्यार्थी परिषद ने विद्यार्थियों के हित में व्यापक आंदोलन खड़ा किया था। उस आंदोलन में परिषद के आठ कार्यकर्ताओं को 11 दिनों तक जेल में रहना पड़ा, लेकिन कार्यकर्ता पीछे नहीं हटे और विद्यार्थियों की आवाज को मजबूती से उठाते रहे। विद्यार्थी परिषद का संघर्ष किसी एक दिन या किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं रहा है। कार्यकर्ता लगातार विद्यार्थियों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए प्रयास करते रहे हैं। कुछ लोगों द्वारा तीन लाख रुपये की सोने की चेन छीने जाने का दावा किया जा रहा है। यदि ऐसा कोई मामला हुआ है तो संबंधित व्यक्ति को उसके प्रमाण और पुलिस अथवा प्रशासन के समक्ष की गई शिकायत के बारे में स्पष्ट रूप से बताना चाहिए। केवल आरोप लगा देने से कोई बात तथ्य नहीं बन जाती। विद्यार्थी परिषद किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय के पक्ष में नहीं है, लेकिन बिना प्रमाण किसी संगठन या उसके कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाना भी उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि अब कुछ लोगों द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों एवं विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। मैं ऐसे आरोप लगाने वालों को चुनौती देता हूं कि यदि उन्हें अपने आरोपों पर विश्वास है तो वे हमारे साथ चलें और नियमानुसार मेडिकल टेस्ट करवाएं। जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना किसी प्रमाण के इस प्रकार के गंभीर आरोप लगाकर शिक्षकों और विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं की छवि खराब करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

गोरखपुर महानगर विभाग संयोजक प्रशांत त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के पास यदि विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं अथवा शिक्षकों के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों के कोई प्रमाण हैं तो उन्हें सामने लाना चाहिए। केवल आरोप-प्रत्यारोप के माध्यम से विश्वविद्यालय का वातावरण खराब करना उचित नहीं है। विद्यार्थी परिषद हमेशा विद्यार्थियों के हितों और विश्वविद्यालय में सकारात्मक एवं शैक्षणिक वातावरण के लिए कार्य करती रही है और आगे भी विद्यार्थियों की आवाज को मजबूती से उठाती रहेगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न दस्तावेज एवं अन्य प्रमाण पत्रकारों के समक्ष रखे। प्रस्तुत किए गए तथ्यों के आधार पर परिषद ने आरोप लगाया कि संबंधित तथाकथित छात्रों द्वारा आम विद्यार्थियों से पैसे वसूलने तथा उन्हें बहला-फुसलाकर आर्थिक रूप से परेशान करने का काम किया जा रहा है। परिषद ने कहा कि यदि इन आरोपों पर किसी को आपत्ति है तो वह संबंधित तथ्यों एवं प्रमाणों के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय