यूपी में संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर विशेष अभियान शुरू, अटारी कानपुर ने बनाई रणनीति : डॉ. राघवेंद्र सिंह
कानपुर, 22 अप्रैल (हि.स.)। प्रदेश में उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरक प्रयोग करना चाहिए ताकि उत्पादन भी बढ़े और भूमि की सेहत भी बनी रहे। यह बातें बुधवार को आईसीएआर-अटारी कानपुर के निदेशक राघवेंद्र सिंह ने कही।
आईसीएआर-अटारी, कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश में उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में कृषि विश्वविद्यालयों के निदेशकों और प्रदेश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों के अध्यक्षों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस विशेष अभियान को प्रभावी रूप से लागू करने की रणनीति तैयार करना था।
डॉ. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि अभियान का लक्ष्य किसानों में उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग को कम करना है। इसके लिए अटारी कानपुर को पूरे प्रदेश में समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन को बढ़ावा देना आवश्यक है, जिससे किसान अपनी भूमि की जरूरत के अनुसार ही पोषक तत्वों का प्रयोग करें।
बैठक में वैकल्पिक पोषक स्रोतों पर भी जोर दिया गया। कृषि विज्ञान केंद्रों को ढैंचा और सनई जैसी हरी खाद की फसलों के प्रदर्शन कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही जैव उर्वरक के रूप में एजोला उत्पादन इकाइयों की स्थापना और हरी खाद के गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन हेतु प्रक्षेत्र चिन्हित करने पर चर्चा हुई।
अंत में निदेशक ने कहा कि किसान गोष्ठियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और फील्ड प्रदर्शन के माध्यम से इस जागरूकता को जमीनी स्तर तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि टिकाऊ खेती के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और जो केंद्र पहले से कार्य कर रहे हैं, वे सराहनीय हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मो0 महमूद

