home page

गोरखपुर पुलिस ने खाेज निकाले 1.30 करोड़ के खोए 826 मोबाइल फोन

 | 
गोरखपुर पुलिस ने खाेज निकाले 1.30 करोड़ के खोए 826 मोबाइल फोन


गोरखपुर पुलिस ने खाेज निकाले 1.30 करोड़ के खोए 826 मोबाइल फोन


गोरखपुर, 08 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में गाेरखपुर जिले की पुलिस ने भारत सरकार के सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआर) पोर्टल की मदद से अभियान के 11वें चरण में 826 एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइलों की अनुमानित कीमत एक करोड़ 49 लाख एक हजार 394 रुपये आंकी गई है। बरामद मोबाइलों को उनके वास्तविक स्वामियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

पुलिस लाइन में मंगलवार को आयोजित प्रेसवार्ता में पुलिस अधीक्षक नगर निमिष पाटील ने बताया कि सीईआईआर पोर्टल की मदद से गुम और चोरी हुए मोबाइलों की लगातार निगरानी की जा रही है। इस दौरान सहायक पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार एस भी मौजूद रहे। एसपी सिटी ने बताया कि इस अभियान के तहत सीईआईआर माध्यम से अब तक 11 चरणों में कुल 3463 एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद कर चुकी है इन मोबाइलों की अनुमानित कीमत 5 करोड़ 98 लाख 36 हजार 978 रुपये बताई है।

इस अभियान के जरिए बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को उनका कीमती मोबाइल वापस मिला है, जिन्होंने उसके गुम या चोरी होने के बाद उसे दोबारा पाने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। बरामदगी के आंकड़ों पर नजर डालें तो चार सितंबर 2023 को पहले चरण में चार मोबाइल बरामद हुए थे। इनकी कीमत 43,748 रुपये थी। इसके बाद 18 नवंबर 2023 को दूसरे चरण में 29, 24 जनवरी 2024 को तीसरे चरण में 51 और 24 मार्च 2024 को चौथे चरण में 77 मोबाइल बरामद किए गए।

इसी क्रम में 17 मई 2024 को पांचवें चरण में 120, 25 अगस्त 2024 को छठे चरण में 267 और 28 अक्टूबर 2024 को सातवें चरण में 224 मोबाइल बरामद हुए। इसके बाद 12 मार्च 2025 को आठवें चरण में 260 और 13 सितंबर 2025 को नौवें चरण में 753 मोबाइल बरामद किए गए। अभियान को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने 10 अप्रैल 2026 को दसवें चरण में सर्वाधिक 852 मोबाइल फोन बरामद किए। अब 8 सितंबर 2026 को 11वें चरण में 826 मोबाइल बरामद किए गए हैं। इस प्रकार 11 चरणों में कुल 3463 मोबाइल पुलिस के हाथ लगे हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सीईआईआर पोर्टल ने गुम और चोरी हुए मोबाइलों की बरामदगी को काफी आसान बनाया है। पहले बंद पड़े मोबाइल का पता लगाना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण होता था, लेकिन इस पोर्टल के माध्यम से जैसे ही कोई मोबाइल दोबारा नेटवर्क पर सक्रिय होता है, उसकी ट्रेसबिलिटी मिलने की संभावना बढ़ जाती है। मोबाइल की लोकेशन और इस्तेमाल किए जा रहे सिम की जानकारी मिलने के बाद पुलिस संबंधित व्यक्ति तक पहुंचती है। इससे न केवल मोबाइल बरामद करने में मदद मिलती है, बल्कि चोरी अथवा गुमशुदगी से जुड़े मामलों की जांच को भी तकनीकी आधार मिलता है।

एसपी सिटी ने बताया कि इस अभियान में थानों के सीसीटीएनएस कार्यालयों में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर और कंप्यूटर ऑपरेटर चालक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सीआईईआर पोर्टल पर प्राप्त सूचनाओं की निगरानी से लेकर मोबाइल की ट्रेसबिलिटी के आधार पर संबंधित थाने को जानकारी उपलब्ध कराने तक पूरी प्रक्रिया में तकनीकी कर्मचारियों का योगदान रहता है।

सीसीटीएनएस सेल के कंप्यूटर ऑपरेटर विकास कुमार और अजीत कुमार भी पोर्टल से संबंधित कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने अभियान में लगे कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। पुलिस का कहना है कि मोबाइल फोन गुम अथवा चोरी होने के बाद पीड़ित को तत्काल इसकी सूचना दर्ज कराना बेहद जरूरी है। मोबाइल का आईएमईआई नंबर और अन्य आवश्यक विवरण उपलब्ध होने से सीआईईआर पोर्टल के माध्यम से उसकी निगरानी और बरामदगी की संभावना बढ़ जाती है।

गोरखपुर पुलिस के मुताबिक सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से मोबाइल बरामदगी का अभियान आगे भी जारी रहेगा। करीब छह करोड़ रुपये मूल्य के 3463 मोबाइल की बरामदगी तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और पुलिस की सतत निगरानी का परिणाम है। इससे जहां लोगों को उनके खोए हुए मोबाइल वापस मिल रहे हैं, वहीं मोबाइल चोरी और गुमशुदगी से जुड़े मामलों की जांच को भी नई तकनीकी मजबूती मिल रही है।--------------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय