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विश्वविद्यालयों को अपने कार्यों के ठोस परिणाम समाज के समक्ष प्रस्तुत करने चाहिए : राज्यपाल

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विश्वविद्यालयों को अपने कार्यों के ठोस परिणाम समाज के समक्ष प्रस्तुत करने चाहिए : राज्यपाल


लखनऊ, 08 मई(हि.स.)। प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को जन भवन में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति एवं अन्य अधिकारियों की समीक्षा बैठक की।

इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य का परिणाम महत्वपूर्ण होता है। विश्वविद्यालयों को अपने कार्यों के ठोस परिणाम समाज के समक्ष प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने मिलेट उत्पादन को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का कार्य केवल शिक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग एवं विपणन तक उसकी सक्रिय भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि निजी कंपनियों को आमंत्रित कर विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित उत्पादों के विक्रय की प्रभावी व्यवस्था की जाए।

उन्होंने कहा कि जिस लक्ष्य के साथ कार्य प्रारम्भ किया जाए, उसे पूर्णता तक पहुंचाना आवश्यक है। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना एवं सरकार की अन्य योजनाओं से जोड़ने, विद्यार्थियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने तथा ऐसे विद्यार्थियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए जिन्हें रोजगार अथवा उद्यम स्थापना हेतु वित्तीय सहयोग की आवश्यकता हो।

राज्यपाल ने ऐसे फल एवं सब्जियों की खेती को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जिनका उत्पादन प्रदेश में कम होता है। उन्होंने कहा कि आय सृजन के लिए यूनिक एवं उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों का उत्पादन आवश्यक है। उन्होंने परंपरागत उत्पादों की प्रोसेसिंग के साथ नए उत्पाद विकसित करने तथा फलों एवं सब्जियों के अपव्यय को रोकते हुए उन्हें उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमि, नक्शा, सीमांकन एवं अतिक्रमण हटाने के विषय पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल ने निर्देश दिए कि जिन कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमि विश्वविद्यालय के नाम पर दर्ज नहीं है, उन्हें विश्वविद्यालय के नाम दर्ज कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएं। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के गर्ल्स छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

राज्यपाल ने जन भवन में संचालित नवाचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां पॉक्सो एक्ट से प्रभावित बच्चियों को सिलाई एवं अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने छात्राओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं हीमोग्लोबिन जांच पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने मेरठ में उत्पादित खेल सामग्री उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के उद्योगों एवं उद्यमों से सीएसआर फंड प्राप्त कर विकासात्मक कार्यों को गति दी जा सकती है। उन्होंने कृषि उत्पादकता बढ़ाने, बहुफसली खेती को प्रोत्साहित करने तथा आयात कम एवं निर्यात अधिक करने की दिशा में कार्य करने पर बल दिया।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को गन्ना उत्पादन के लिए उपयुक्त बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि गन्ने के साथ-साथ अन्य फसलों का उत्पादन भी बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता बनाए रखने तथा समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक जिम्मेदारी तय करने पर बल दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय