home page

राष्ट्रीय बौद्ध महासभा का प्रांतीय बौद्ध धर्म अधिवेशन संपन्न, युवाओं से संगठन में जुड़ने का किया आह्वान

 | 
राष्ट्रीय बौद्ध महासभा का प्रांतीय बौद्ध धर्म अधिवेशन संपन्न, युवाओं से संगठन में जुड़ने का किया आह्वान


लखनऊ, 26 जुलाई (हि.स.)। राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की सामाजिक न्याय (आरक्षण) के 124 वर्ष पूर्ण होने पर रविवार को राष्ट्रीय बौद्ध महासभा का एक दिवसीय प्रांतीय बौद्ध धर्म अधिवेशन का आयोजन किया गया।

महासभा की उत्तर प्रदेश इकाई की ओर से राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की सामाजिक न्याय (आरक्षण) क्रांति के उपलक्ष्य में राजधानी लखनऊ में विधानसभा मार्ग स्थित चौधरी चरण सिंह ऑडिटोरियम, सहकारिता भवन में आयोजित अधिवेशन में प्रदेश के सभी 75 जनपदों से आए पदाधिकारियों एवं बौद्ध अनुयायियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य भिक्षु संघ द्वारा बुद्ध वंदना एवं धम्म देशना से हुआ।

मुख्य अतिथि एवं महासभा के संस्थापक, पूर्व विधायक धर्म प्रकाश भारती बौद्ध ने कहा कि राष्ट्रीय बौद्ध महासभा पिछले लगभग 20 वर्षों से पूरे भारत में सामाजिक परिवर्तन, बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार एवं बहुजन महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने युवाओं से संगठन से जुड़कर समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.एस. बौद्ध ने संगठन को गाँव-गाँव तक सशक्त बनाने, युवाओं को सामाजिक परिवर्तन के अभियान से जोड़ने तथा संगठन की मजबूती को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा आधार बताया।

मुख्य वक्ता दीपांकर बौद्ध ने अपने धम्म उपदेश में कहा कि महाबोधि विहार, बोधगया की मुक्ति के लिए चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन की जानकारी देते हुए बौद्ध समाज से एकजुट होकर अपने धार्मिक एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता दयासागर बौद्ध ने बौद्ध समाज के लिए पृथक बौद्ध पर्सनल लॉ एवं पाली भाषा को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा देने की मांग रखी।

कार्यक्रम सहसंयोजक अध्यक्ष छत्रपति शाहू जी महाराज स्मृति मंच रामचन्द्र पटेल ने शिक्षा का राष्ट्रीयकरण कर पूरे देश में समान एवं निःशुल्क शिक्षा व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह भी घोषणा किया आरक्षण के 125 वर्ष 2027 में पुरे होने पर आरक्षण वर्ष मनाया जाएगा।

विशेष अतिथि गुरुचरण गौतम (पूर्व जनरल सचिव, रेलवे कर्मचारी संघ) ने कहा कि आज बहुजन समाज बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और सामाजिक असमानता जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में समाज को संगठित होकर शिक्षा, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक जागरूकता के आधार पर आगे बढ़ना होगा।

महासभा के चीफ जनरल सेक्रेटरी योगेश गौतम ने युवाओं से राष्ट्रीय बौद्ध महासभा से जुड़कर अपने महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने, संगठन को मजबूत बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

प्रदेश प्रभारी आर.एस. रवि बौद्ध ने सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए समाज की एकजुटता का आह्वान किया।

राष्ट्रीय महासचिव दशरथ मौर्य ने संगठन, शिक्षा और जागरूकता को सामाजिक परिवर्तन का आधार बताया। पूर्व संगठन सचिव बी.एल. चंद्रा ने युवाओं से समाजहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। पूर्व प्रदेश महासचिव सुशील निगम ने संगठन विस्तार को समय की आवश्यकता बताया।

इस दौरान प्रमुख रूप से विश्वनाथ (उपाध्यक्ष, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, वित्त विकास निगम), विमला बौद्ध (राष्ट्रीय अध्यक्ष, संविधान सम्मान समिति), एड. पंकज प्रसून (हाईकोर्ट लखनऊ), राजेश कुमार सिद्धार्थ अध्यक्ष संयोजक डॉ अंबेडकर संम्बैधानिक महासंघ, मो. अब्दुल रहमान, नरेश पाल (राष्ट्रीय महासचिव अम्बेडकर माह समिति लखनऊ), भारत सिंह, प्रेमनारायण (झांसी), जगदीश बौद्ध (बरेली), एड. दयाराम बौद्ध (पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, ललितपुर), डॉ. जगजीवन बौद्ध (लखनऊ), अशोक कुमार शाक्य (कासगंज), भरत सिंह लोधी (एटा), दयालीराम बौद्ध (झांसी), शीला भारती (प्रयागराज), आनंद स्वरूप बौद्ध (इटावा), अशोक कुमार (औरैया), सुरेन्द्र सिंह करुणाकर (कानपुर), योगेश (लखनऊ), हरीश कुमार सत्यार्थी (बरेली), छोटेलाल माथुर (बरेली) आदि लोग उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा