home page

रायपुर में एसएसबी के सूबेदार की मौत, सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

 | 
रायपुर में एसएसबी के सूबेदार की मौत, सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार


रायपुर में एसएसबी के सूबेदार की मौत, सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार


सुलतानपुर, 15 सितंबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के रायपुर में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में सूबेदार पद पर तैनात उत्तर प्रदेश के जिला सुलतानपुर के आनंद प्रकाश तिवारी का मंगलवार को हवाई जहाज से पार्थिव शरीर लखनऊ और वहां से सेना के वाहन से दोपहर में पैतृक गांव कुड़वार थाना क्षेत्र के नेवरा लाया गया। जहां मां, पत्नी सभी शव देखते ही चीख-चीख कर रोने लगे।

जिले के कुड़वार के नेवरा खादर बसंतपुर निवासी हवलदार आनंद प्रकाश तिवारी (41) की सोमवार सुबह छत्तीसगढ़ के कांकेर के अंतागढ़ में एसएसबी के कुहचे कैंप में गोली लगने से मौत हो गई। कैंप से जानकारी मिलने के बाद परिवार में मातम छा गया। एसएसबी की 28वीं बटालियन में आनंद प्रकाश की तैनाती थी। गोली लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। राजकीय सम्मान के साथ सेना के जवानों ने मंगलवार को पार्थिव शरीर को गॉर्ड ऑफ़ ऑनर दिया। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शव कुड़वार घाट ले जाया गया।

उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा हम शोक संवेदना प्रकट करने आए थे। पूरे कांग्रेस परिवार के लोग इस परिवार के साथ खड़े हैं। मेरी सरकार से मांग है जो आर्थिक सहयोग, नौकरी है वो सब इनके परिवार काे मिलना चाहिए।

जवान के भाई ने बताया मै सूरत में था भतीजे का फोन आया था। आनंद अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। वह साल 2007 में सेना में भर्ती हुए थे और उनकी तैनाती छत्तीसगढ़ के रायपुर में थी। पिता बलराम तिवारी रिटायर्ड पोस्टमैन हैं। आनंद आखिरी बार 8 महीने पहले घर आए थे। उन्हें अगले महीने अक्टूबर में घर आना था, क्योंकि 28 अक्टूबर को घर पर भागवत का आयोजन होना था।

12 सितंबर को शाम करीब 9 बजे उनकी अपने पिताजी से फोन पर आधे घंटे बात हुई थी। इस दौरान उन्होंने पिताजी से भागवत के लिए छुट्टी मिलने की बात कही थी। उन्होंने पिता को परेशान न होने के लिए भी कहा था। उनकी शहादत की सूचना परिवार को रायपुर कंट्रोल रूम से मिली।

इस मौके पर एसडीएम सदर गरिमा सौनकिया, सीओ सिटी राघवेंद्र सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू समेत सैकड़ों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / दयाशंकर गुप्त