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भारतीय राज और समाज को अधिक लोकतांत्रिक होने की जरूरत: प्रो. आनंद कुमार

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भारतीय राज और समाज को अधिक लोकतांत्रिक होने की जरूरत: प्रो. आनंद कुमार


प्रयागराज, 22 जून (हि.स)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग मिशन परियोजना के तहत यूजीसी-एमएमटीटीसी के ईश्वर शरण पीजी कॉलेज द्वारा सोमवार को एक माह के गुरू दक्षता कार्यक्रम का आरम्भ हुआ। उद्घाटन सत्र में ‘आधुनिक भारत में राज और समाज’ विषय पर देश के जाने-माने समाजशास्त्री प्रो. आनंद कुमार ने कहा कि भारतीय राज और समाज को अधिक लोकतांत्रिक होने की जरूरत है, क्योंकि भारतीय संविधान में निहित मूल्य राज्य और सामाजिक व्यवस्था को अधिक समतामूलक और जिम्मेदार बनाने पर जोर देते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत में राज और समाज निर्माण को आजादी के पूर्व और आजादी के बाद दो हिस्सों में बांटकर देखा जा सकता है। आजादी के पूर्व भारत में राजनीति और समाज ब्रिटिश साम्राज्य के प्रभाव में थी और आजादी के बाद इसका निर्माण भारतीय संविधान द्वारा सृजित मूल्यों के आधार पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में हम आधुनिक भारत के निर्माण की प्रक्रिया को समाज निर्माण, राष्ट्र निर्माण और नागरिक निर्माण के क्रम में समझ सकते हैं। इसके लिए राज्य की ओर से प्रदान की जाने वाली शिक्षा, उसकी अर्थव्यवस्था, तकनीकी और उसका संविधान एक संसाधन की तरह कार्य करते हैं।

उन्होंने भारत में नब्बे के दशक से शुरू हुई भूमंडलीकरण की प्रक्रिया के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों की विवेचना की और देश की राष्ट्रीय पहचान को शिक्षा, मीडिया और राजनीतिक दलों द्वारा सामूहिक रूप से मिलकर निर्मित करने का आह्वान किया।

ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के प्राचार्य और मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग केंद्र के निदेशक प्रो. आनंद शंकर सिंह ने गुरु दक्षता कार्यक्रम हेतु शुभकामनाएं और मार्गदर्शन देते हुए कहा कि शिक्षक विद्या के जरिए तीनों लोकों को जीत सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को इस गुरू दक्षता कार्यक्रम में यह सीखना चाहिए कि वे अपने विद्यार्थियों के भीतर नागरिक गुणों का संचरण कैसे किया जाए जिससे एक बेहतर राष्ट्र निर्माण हो सके।

फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम के दूसरे सत्र में ‘समाज विज्ञान और विकास के क्षेत्र में शोध प्रस्ताव’ पर राजनीति शास्त्री, पीपल्स पल्स के निदेशक और चुनाव विश्लेषक डॉ. राजन पांडेय ने कहा कि वर्तमान में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद और भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद समेत देश के अन्य शोध केंद्रित संस्थाओं और परिषदों द्वारा शोध को बढ़ावा देने हेतु प्रस्तावों को अनुमोदित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में शिक्षकों का दायित्व क्लासरूम टीचिंग से बढ़कर भी है, उन्हें बेहतर शोध और विचार विमर्श के माध्यम से देश के अकादमिक परिदृश्य में हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने विषय के चयन, परिकल्पना, उद्देश्य, शोध प्राविधि, साहित्य की समीक्षा और निष्कर्षों को बेहतर शोध प्रस्ताव बनाने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने राजनीतिक कंसल्टेंसी के क्षेत्र में डाटा संग्रहण, डाटा विश्लेषण और रणनीति निर्माण विषय पर कहा कि भारत में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी का क्षेत्र नया है और इस क्षेत्र में शोध की गुंजाइश अधिक है। केंद्र के सह निदेशक डॉ. मनोज कुमार दुबे ने बताया कि यह गुरुदक्षता कार्यक्रम अगले एक महीने तक संचालित होगा जिसमें देश के 20 से अधिक राज्यों के 125 प्रतिभागियों ने शिरकत की। इस अवसर पर दक्षता कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अंकित पाठक, सह संयोजक डॉ. अरविंद देव, प्रो. धीरज चौधरी, डॉ. शाइस्ता इरशाद, डॉ. महेश प्रसाद राय, डॉ. अरविंद मिश्रा और डॉ. विकास कुमार समेत सैकड़ों शिक्षक पदभागी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंकित पाठक ने एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अरविंद देव ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र