कलकतिया गेंदे' की खेती से चमकी कानपुर के किसान की किस्मत
- 47 वर्षों की साधना से बिधनू के जय नारायण सिंह बने मिसाल
- 1979 से जारी है फूलों की खेती का सफर, कर रहे कलकतिया गेंदे की उन्नत खेती
- कृषि योजनाओं से मिला प्रोत्साहन, 2,000 से अधिक किसानों को ट्रेनिंग देकर बनाया आत्मनिर्भर
- सावन में 70 तो जन्माष्टमी पर 200 रुपये किलो तक पहुंचता है गेंदे का भाव
कानपुर, 11 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की किसान-हितैषी योजनाओं, अनुदान और आधुनिक कृषि प्रशिक्षण के बल पर राज्य के किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर व्यावसायिक खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। सरकार द्वारा कृषि विविधीकरण को दिए जा रहे बढ़ावा से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक बदलाव दिख रहा है। सरकारी प्रोत्साहन और वैज्ञानिक मार्गदर्शन का सही उपयोग कर किसान न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। कानपुर नगर के बिधनू ब्लॉक स्थित भारू गांव के प्रगतिशील किसान जय नारायण सिंह इसी बदलाव की एक सफल मिसाल हैं।
जय नारायण सिंह सेंगर पिछले 47 वर्षों से फूलों की खेती से जुड़े हैं। वे बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 1979 में इसकी शुरुआत की थी। शुरुआत में वे अपने 4 बीघे के खेत में गुलाब और गेंदा दोनों उगाते थे, लेकिन देखरेख की लागत बढ़ने के कारण लगभग चार साल पहले उन्होंने गुलाब की खेती बंद कर पूरी तरह गेंदे पर ध्यान केंद्रित कर लिया। वर्तमान में वे 1.5 बीघे में 'कलकतिया गेंदा' का उत्पादन कर रहे हैं। वे बताते हैं कि कोलकाता से मंगाई गई पौध से तैयार पौधे एक महीने में लगभग 90 क्विंटल गेंदे का उत्पादन देते हैं।
लागत, पौध प्रबंधन और पौधों की नर्सरी
पौध प्रबंधन और लागत का पूरा गणित समझाते हुए जय नारायण बताते हैं कि वे कोलकाता से जो पौध मंगाते हैं, उसकी शुरुआती कीमत 500 रुपये में 1000 पौध पड़ती है। जब इस पौध को लाकर अपने खेत में नर्सरी के रूप में तैयार किया जाता है और रोपाई की जाती है, तो देखभाल के बाद 1000 में से लगभग 800 पौधे ही पूरी तरह से स्वस्थ तैयार हो पाते हैं। जय नारायण बताते हैं कि वर्तमान में उनके 1.5 बीघे खेत में करीब 15,000 गेंदे के पौधे पूरी तरह से लहलहा रहे हैं। इन 15 हजार पौधों की नियमित सिंचाई, वैज्ञानिक देखरेख के बल पर वे निरंतर बेहतर उत्पादन कर पा रहे हैं।
वे बताते हैं, गेंदे की मांग कानपुर के अलावा दिल्ली, लखनऊ, झांसी और जालौन की मंडियों में लगातार बनी रहती है। जय नारायण बताते हैं कि त्योहारों के हिसाब से इसके दाम तय होते हैं। सावन के महीने में गेंदा 70 रुपये प्रति किलो बिकता है, वहीं जन्माष्टमी और नवरात्रि जैसे बड़े पर्वों पर यह 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। हालांकि जब सीजन नहीं होता तो भाव कम हो जाते हैं। इसके बावजूद, एक महीने में करीब 2 लाख तक की कमाई कर लेते हैं और पूरे साल की बात करें तो करीब 10 लाख तक की कमाई हो जाती है।
जय नारायण की इस लगन और नवाचार को राष्ट्रीय पहचान भी मिली है। वर्ष 2013 में उन्हें गुजरात सरकार द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। जिला प्रशासन द्वारा भी उन्हें लगातार सराहा जा रहा है। योगी सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर वे खुद भी आत्मनिर्भर बने हैं और अब तक 2,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण देकर फूलों की व्यावसायिक खेती से जोड़ चुके हैं।
जय नारायण सिंह सेंगर, प्रगतिशील किसान (भारू गांव, बिधनू) ने मंगलवार को कहा कि पारंपरिक खेती के साथ अगर किसान बाजार की मांग को समझकर गेंदे जैसी व्यावसायिक फसलों को अपनाएं, तो कम जमीन में भी बेहतरीन मुनाफा मुमकिन है। योगी सरकार की योजनाएं और उद्यान विभाग की ओर से समय-समय पर मिलने वाला प्रशिक्षण किसानों की दशा बदलने में बेहद मददगार साबित हो रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

