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एशियाई खेलों में पदार्पण को तैयार कमलजीत बोले- माता-पिता ने कभी हार नहीं मानने दी

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एशियाई खेलों में पदार्पण को तैयार कमलजीत बोले- माता-पिता ने कभी हार नहीं मानने दी


नई दिल्ली, 07 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा के रेवाड़ी के 22 वर्षीय निशानेबाज कमलजीत एची-नागोया-2026 एशियाई खेलों में पहली बार भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं। पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में उतरने वाले कमलजीत ने अपने संघर्ष, परिवार के त्याग और भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) की पारदर्शी चयन प्रक्रिया को अपनी सफलता का सबसे बड़ा आधार बताया।

कमलजीत ने बताया कि उनका खेल सफर एथलेटिक्स से शुरू हुआ था, लेकिन चोट के कारण उन्हें ट्रैक छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने 2019 में पिस्टल शूटिंग अपनाई और आज देश के शीर्ष निशानेबाजों में शामिल हैं। उन्होंने एक आधिकारिक बयान में कहा, हम मध्यमवर्गीय परिवार से हैं, लेकिन मेरे माता-पिता ने कभी मुझे शूटिंग छोड़ने नहीं दी। शुरुआत में कोर्स की फीस और प्रतियोगिताओं का खर्च मुझे खुद उठाना पड़ता था। कई बार लगा कि अब आगे नहीं खेल पाऊंगा, लेकिन परिवार ने बिना कोई सवाल किए हर कदम पर मेरा साथ दिया।

कमलजीत ने अपने कोच और परिवार की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने कहा, मेरे केवल एक ही शूटिंग कोच हैं, जिन्होंने मुझे शुरुआत से सब कुछ सिखाया। वह मेरे ही गांव के हैं, इसलिए हमारे बीच परिवार जैसा रिश्ता है। मेरे कोच और मेरे चाचा ने इस पूरे सफर में मेरी सबसे मजबूत नींव तैयार की। उन्होंने बताया कि शुरुआती आर्थिक कठिनाइयों के बाद भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और एनआरएआई के सहयोग ने उनका सफर आसान बनाया।

कमलजीत ने कहा, पहले बुनियादी खर्च उठाना भी मुश्किल होता था, लेकिन साई से सहयोग मिलने के बाद मैं पूरी तरह अपने खेल पर ध्यान दे सका। एनआरएआई की चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रदर्शन आधारित है। राष्ट्रीय टीम में मेरा चयन सिर्फ रैंकिंग अंकों के आधार पर हुआ। जब आपको पता होता है कि हर अंक मायने रखता है और चयन केवल प्रदर्शन से होगा, तो आत्मविश्वास अपने आप बढ़ जाता है।

उन्होंने आगे कहा, एनआरएआई हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर की बेहतरीन पिस्टल और गोला-बारूद उपलब्ध कराता है। इससे उपकरणों की चिंता खत्म हो जाती है और हम सिर्फ अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे पाते हैं। उन्होंने कहा, विश्व कप मेरे लिए सीखने का बड़ा अवसर था। प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन उससे मुझे अपनी तैयारियों में सुधार करने की प्रेरणा मिली। यह मेरा पहला एशियाई खेल होगा और अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलने के बाद मैं पहले से कहीं ज्यादा आत्मविश्वास के साथ जापान में उतरूंगा।

कमलजीत ने 2023 आईएसएसएफ जूनियर विश्व चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल जूनियर स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था। हाल ही में उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित एशियाई निशानेबाजी चैंपियनशिप में रजत पदक भी अपने नाम किया। उनका मानना है कि विश्व कप में मिला अनुभव एशियाई खेलों में उनके लिए काफी उपयोगी साबित होगा।

अपने सफर को याद करते हुए कमलजीत ने कहा, पहले मैं सिर्फ अभ्यास में अच्छे स्कोर करता था, लेकिन अब मुझे भरोसा है कि प्रतियोगिता के दबाव में भी वही प्रदर्शन कर सकता हूं। मैंने एक बात हमेशा याद रखी है कि अगर चीजें आपकी योजना के अनुसार नहीं होतीं, तो अक्सर उससे भी बेहतर तरीके से होती हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे