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आईओए ने 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक की मेजबानी के लिए ‘साथ बढ़ते भारत’ की परिकल्पना रखी

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आईओए ने 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक की मेजबानी के लिए ‘साथ बढ़ते भारत’ की परिकल्पना रखी


नई दिल्ली, 07 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत की परिकल्पना पेश करते हुए इसे दो प्रभावशाली शब्दों- ‘साथ बढ़ते भारत’ में व्यक्त किया है।

आईओए ने कहा कि भारत में 2036 खेलों का आयोजन देश में खेलों के माध्यम से बदलाव की गति तेज करने के साथ-साथ ओलंपिक आंदोलन के लिए सार्वभौमिक विस्तार का नया अध्याय खोल सकता है।

आईओए ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा इस सप्ताह 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों के भावी मेजबान के चयन की प्रक्रिया में शामिल शहरों और देशों की घोषणा का स्वागत किया।

गुजरात के अहमदाबाद केंद्रित भारत की ओलंपिक और पैरालंपिक मेजबानी की महत्वाकांक्षा पिछले 18 महीनों में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के साथ करीबी और रचनात्मक संवाद के जरिए विकसित की गई है। ‘साथ बढ़ते भारत’ की परिकल्पना इस विश्वास पर आधारित है कि 2036 ऐसा अवसर हो सकता है, जब खेलों के माध्यम से भारत का बदलाव और ओलंपिक आंदोलन का सार्वभौमिक भविष्य एक साथ आगे बढ़े।

भारत के लिए ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी राष्ट्रीय जीवन के केंद्र में खेलों को स्थापित करने का पीढ़ीगत अवसर होगी। इस परियोजना को व्यापक खेल परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे लाखों युवा केवल खेल देखने के बजाय उनमें भाग लेने के लिए प्रेरित हों। इसके साथ स्वस्थ और सक्रिय समुदायों को बढ़ावा देने तथा शिक्षा और रोजगार के अवसरों में खेलों की भूमिका बढ़ाने पर भी जोर होगा।

भारत में खेलों के आयोजन का उद्देश्य केवल वैश्विक स्तर की प्रतियोगिता की मेजबानी करना नहीं है बल्कि रोजमर्रा के जीवन में खेलों को और गहराई से स्थापित करना तथा ऐसी विरासत तैयार करना है, जो भारत की ऊर्जा, युवा शक्ति और समाज को बदलने में खेलों की क्षमता में उसके विश्वास को दर्शाए।

ओलंपिक आंदोलन के लिए भारत में 2036 खेलों का आयोजन सार्वभौमिकता के एक नए दौर में प्रवेश का अवसर होगा। इससे ओलंपिक और पैरालंपिक आंदोलन दुनिया की सबसे युवा, गतिशील और डिजिटल रूप से जुड़ी आबादी में से एक के साथ और मजबूत तरीके से जुड़ सकेगा। इससे एक अरब से अधिक लोगों तक ओलंपिक खेलों की पहुंच बढ़ाने के साथ नए खिलाड़ियों, दर्शकों और साझेदारों को ओलंपिक परिवार से जोड़ने की क्षमता पैदा होगी।

आईओए की अध्यक्ष पी. टी. उषा ने कहा, “हम 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों के लिए भारत की परिकल्पना और आकांक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की मान्यता मिलने से बेहद सम्मानित महसूस कर रहे हैं और भविष्य के खेलों के संभावित मेजबानों के एक असाधारण समूह का हिस्सा होने पर गर्व है। “हमारे लिए ‘साथ बढ़ते भारत’ केवल एक नारा नहीं है, बल्कि साझा ओलंपिक सपने के पीछे भारत की ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और विविधता को एकजुट करने की एक मजबूत प्रतिबद्धता है। 2036 के लिए अपनी परिकल्पना तैयार करते हुए हम ऐसे खेलों का आयोजन करना चाहते हैं, जो एक युवा, गतिशील और आगे बढ़ते भारत के आत्मविश्वास को दर्शाएं और साथ ही दुनिया भर में नई पीढ़ियों, नए समुदायों और नए क्षितिज तक पहुंचने की ओलंपिक और पैरालंपिक आंदोलन की महत्वाकांक्षा में योगदान दें।'

उन्होंने कहा, “यदि हम अपने खिलाड़ियों, अपने लोगों, अपने शहरों और ओलंपिक एवं पैरालंपिक आंदोलनों के साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं तो संभावनाएं असीमित हैं। और जब भारत आगे बढ़ेगा तो हम चाहते हैं कि दुनिया भी हमारे साथ आगे बढ़े। हम अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के साथ अपने संवाद को जारी रखने और नवंबर के अंत में पहली बार भविष्य के मेजबान आयोग के सामने अपनी महत्वाकांक्षा पेश करने के लिए उत्सुक हैं।”

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, “2036 के लिए भारत की महत्वाकांक्षा एक सरल विचार पर आधारित है : खेल हमारे देश के भविष्य को आकार देने में मदद कर सकते हैं। ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी लाखों युवा भारतीयों को खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित करेगी, स्वस्थ और अधिक सक्रिय समुदायों को मजबूत करेगी तथा हमारे युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करेगी।

उन्होंने कहा,“भारत में खेलों का आयोजन करके हम ऐसे खेल परिवर्तन को गति दे सकते हैं, जो हमारे समाज के हर हिस्से तक पहुंचे और इसके साथ ही दुनिया के सबसे गतिशील देशों में से एक में ओलंपिक आंदोलन के लिए एक नया और प्रभावशाली अध्याय खोल सकते हैं।”

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे