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खेल मंत्रालय ने टीटीएफआई की मान्यता निलंबित की, आईओए को तदर्थ समिति बनाने का निर्देश

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खेल मंत्रालय ने टीटीएफआई की मान्यता निलंबित की, आईओए को तदर्थ समिति बनाने का निर्देश


नई दिल्ली, 12 अगस्त (हि.स.)। खेल मंत्रालय ने शासन व्यवस्था में खामियों और समय पर चुनाव नहीं कराने सहित कई मुद्दों को लेकर बुधवार को टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीटीएफआई) की मान्यता निलंबित कर दी। मंत्रालय ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ (आईटीटीएफ) के साथ विचार-विमर्श कर खेल के संचालन के लिए एक तदर्थ समिति गठित करने का निर्देश दिया है।

मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि टीटीएफआई को इस साल की शुरुआत में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन महासंघ की ओर से मिले जवाब को असंतोषजनक पाया गया। इसके बाद मान्यता निलंबित करने का फैसला लिया गया। मंत्रालय ने बयान में कहा, “आईओए, अंतरराष्ट्रीय संस्था (आईटीटीएफ) के परामर्श से टीटीएफआई में उचित आंतरिक नियामक व्यवस्था स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। इसमें तदर्थ समिति का गठन भी शामिल होगा, जब तक कि टीटीएफआई में विधिवत गठित शासन व्यवस्था बहाल नहीं हो जाती।”

मंत्रालय ने टीटीएफआई की ओर से समय पर चुनाव नहीं कराने को निलंबन के प्रमुख कारणों में शामिल किया है। मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय खेल महासंघ से अपेक्षित जवाबदेही और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली का पालन नहीं किया गया। साथ ही टीटीएफआई ने मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों और दिशानिर्देशों की बार-बार अनदेखी की।

टीटीएफआई की अध्यक्ष मेघना अहलावत ने दिसंबर, 2022 में पदभार संभाला था। वह महासंघ की पहली महिला अध्यक्ष हैं। उनका कार्यकाल शुरू होने के बाद से ही महासंघ की कार्यप्रणाली को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं।

टीटीएफआई ने इस साल जनवरी में पूर्व खिलाड़ी और महासचिव कमलेश मेहता को कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में निलंबित कर दिया था। मेहता ने इस फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके बाद अदालत ने उनका निलंबन रद्द कर दिया।

यह मामला महासंघ के भीतर चल रहे कथित सत्ता संघर्ष के रूप में भी सामने आया था। हालांकि, टीटीएफआई ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि फैसला पारदर्शिता, सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया और भारतीय टेबल टेनिस के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।

मनिका बत्रा के चयन विवाद से भी घिरा था महासंघ

टीटीएफआई उस समय भी विवादों में आया था जब स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मणिका बत्रा को एशियाई खेलों की टीम में शामिल नहीं किया गया। महासंघ ने इसके पीछे आवश्यक घरेलू मुकाबले नहीं खेलने का कारण बताया था। मणिका ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले की आलोचना करते हुए चयन प्रक्रिया को अस्पष्ट और अनुचित बताया था तथा खेल मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की थी। मंत्रालय ने टीटीएफआई की कार्यप्रणाली से जुड़े इन सभी मामलों का संज्ञान लेते हुए महासंघ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

राष्ट्रीय चैंपियनशिप में देरी पर भी मंत्रालय नाराज

खेल मंत्रालय ने खिलाड़ी कल्याण सुनिश्चित करने में टीटीएफआई की भूमिका पर भी सवाल उठाए। मंत्रालय ने पिछले साल राष्ट्रीय चैंपियनशिप आयोजित करने में हुई देरी को इसका एक उदाहरण बताया। टीटीएफआई को इस साल चुनाव कराने हैं, लेकिन अभी तक चुनाव प्रक्रिया कब शुरू होगी, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

2022 में भी निलंबित हुआ था टीटीएफआई

टीटीएफआई को इससे पहले फरवरी, 2022 में भी दिल्ली उच्च न्यायालय ने निलंबित किया था। उस समय मणिका बत्रा ने महासंघ की चयन नीति को चुनौती दी थी, जिसके चलते उन्हें एशियाई चैंपियनशिप की टीम से बाहर रखा गया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस समय प्रशासक नियुक्त करने का आदेश दिया था और टीटीएफआई की कार्यप्रणाली की स्थिति पर कड़ी टिप्पणी की थी। इसके बाद दिसंबर, 2022 में नए चुनाव होने के बाद महासंघ को बहाल किया गया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे