एशियाई खेलों की सफलता के बाद अब एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी पर भारतीय पुरुष हॉकी टीम की नजर
नई दिल्ली, 08 अक्टूबर (हि.स.)। एशियाई खेलों में लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम का अगला लक्ष्य अब घरेलू मैदान पर हीरो एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब-2026 होगा। प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का आयोजन 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक जालंधर और मोहाली में किया जाएगा।
आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारत ने जापान में मलेशिया को 5-1 से हराकर लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचा। यह पहली बार था जब भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद अब भारतीय टीम घरेलू सरजमीं पर एशिया की शीर्ष हॉकी टीमों के खिलाफ महाद्वीपीय वर्चस्व के लिए उतरेगी। टूर्नामेंट में भारत के अलावा जापान, चीन, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और बांग्लादेश की टीमें हिस्सा लेंगी।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने कहा, “जापान में एशियाई खेलों का स्वर्ण जीतना इस टीम के लिए विशेष उपलब्धि थी। लेकिन अब जश्न पीछे छूट चुका है और हमें अपना ध्यान तेजी से बदलना होगा। हीरो एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब-2026 घरेलू मैदान पर एक नई चुनौती है और हमें अपनी सफलता को आगे बढ़ाने के लिए हर मुकाबले में वही भूख, अनुशासन और तीव्रता बनाए रखनी होगी।”
हीरो एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2026 पंजाब के लिए भी ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि राज्य में अंतरराष्ट्रीय हॉकी की वापसी हो रही है। हॉकी की गहरी संस्कृति और भारतीय हॉकी में महत्वपूर्ण योगदान के लिए पहचाने जाने वाले पंजाब में एशिया की शीर्ष टीमें इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के लिए जुटेंगी।
टूर्नामेंट के सभी लीग चरण के मुकाबले जालंधर के ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में खेले जाएंगे, जबकि निर्णायक मुकाबलों का आयोजन मोहाली में होगा। प्रतियोगिता का समापन मोहाली के ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में होगा।
एशियाई खेलों में मिली सफलता से आत्मविश्वास से भरी भारतीय टीम अब उसी विजयी लय को घरेलू मैदान पर एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में जारी रखने की कोशिश करेगी।
2011 में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत के बाद से भारत चार बार यह खिताब जीत चुका है और टूर्नामेंट की सबसे सफल टीम है। भारत ने 2018 में पाकिस्तान के साथ संयुक्त रूप से भी खिताब साझा किया था। उस वर्ष मस्कट, ओमान में खेला गया फाइनल बारिश के कारण पूरा नहीं हो सका था।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

