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राष्ट्रमंडल खेल: हर भारतीय पदक के पीछे है कोच की अनकही मेहनत

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राष्ट्रमंडल खेल: हर भारतीय पदक के पीछे है कोच की अनकही मेहनत


नई दिल्ली, 27 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के बीच भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने उन कोचों की भूमिका को रेखांकित किया है, जिनकी वर्षों की मेहनत, रणनीति और मार्गदर्शन खिलाड़ियों की सफलता की मजबूत नींव बनते हैं।

पैरा पावरलिफ्टिंग में पदक और भारोत्तोलन में रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ भारत ने शानदार शुरुआत की है, लेकिन इन उपलब्धियों के पीछे कोचों का अथक योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

आईओए अध्यक्ष डॉ. पीटी उषा ने कहा कि हर महान प्रदर्शन के पीछे एक महान कोच होता है। उनके अनुसार कोच वर्षों तक खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने, आत्मविश्वास बढ़ाने और बड़े मुकाबलों के लिए तैयार करने में जुटे रहते हैं। भले ही वे पदक मंच पर दिखाई नहीं देते, लेकिन भारत के हर पदक पर उनकी मेहनत और समर्पण की छाप होती है।

सोमवार को जारी आईओए की विज्ञप्ति के अनुसार भारतीय दल के कोच केवल तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं देते, बल्कि रणनीति तैयार करने, वीडियो विश्लेषण, रिकवरी प्लान बनाने और दबाव के क्षणों में खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने का भी काम करते हैं। यही कारण है कि उन्हें शिक्षक, मार्गदर्शक, मनोवैज्ञानिक और रणनीतिकार की भूमिका एक साथ निभानी पड़ती है।

भारोत्तोलन में मीराबाई चानू के साथ लंबे समय से काम कर रहे कोच विजय शर्मा को देश के सर्वश्रेष्ठ हाई-परफॉर्मेंस कोच में गिना जाता है। वहीं एथलेटिक्स में मुख्य कोच राधाकृष्णन नायर की अगुआई में विशेषज्ञ कोचों की टीम नीरज चोपड़ा, मुरली श्रीशंकर सहित विभिन्न स्पर्धाओं के खिलाड़ियों को लगातार मार्गदर्शन दे रही है। तैराकी में निहार अमीन और संदीप सेजवाल, जबकि मुक्केबाजी में कोचों की रणनीति और मुकाबले के दौरान दिए गए सुझाव खिलाड़ियों के प्रदर्शन में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

पैरा खिलाड़ियों के लिए भी कोचों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत की पदक के साथ शुरुआत ने यह साबित किया कि बेहतर तैयारी और कोच-खिलाड़ी के मजबूत तालमेल से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलताएं हासिल की जा सकती हैं। कोच जितेंद्र पाल सिंह सहित पूरा सहयोगी स्टाफ खिलाड़ियों को तकनीकी और मानसिक रूप से तैयार करने में लगातार जुटा हुआ है।

आईओए का कहना है कि खिलाड़ियों को अनुभवी कोचों और तकनीकी विशेषज्ञों का पूरा सहयोग उपलब्ध कराना उसकी उच्च प्रदर्शन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संघ का मानना है कि हर पदक की शुरुआत मैदान में नहीं, बल्कि प्रशिक्षण शिविर में कोच की योजना, सलाह और प्रेरणा से होती है। यही वजह है कि ग्लासगो में भारत की हर सफलता के पीछे खिलाड़ियों के साथ-साथ उनके कोचों की मेहनत भी बराबर की भागीदार है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे