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जम्मू-कश्मीर ने रचा इतिहास, पहली बार जीता रणजी ट्रॉफी का खिताब

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जम्मू-कश्मीर ने रचा इतिहास, पहली बार जीता रणजी ट्रॉफी का खिताब


हुबली, 28 फरवरी (हि.स.)। भारतीय घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक हाशिए पर रहने वाली जम्मू-कश्मीर टीम ने शनिवार को ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया। केएससीए राजनगर स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में जम्मू-कश्मीर ने आठ बार की चैंपियन कर्नाटक को पहली पारी में 291 रनों की विशाल बढ़त के आधार पर मात दी। मैच ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी की बढ़त के कारण जम्मू-कश्मीर को विजेता घोषित किया गया।

जम्मू-कश्मीर अब रणजी ट्रॉफी जीतने वाली 19वीं अलग टीम बन गई है। इससे पहले वह 2013-14, 2019-20 और 2024-25 में क्वार्टरफाइनल तक पहुंची थी। पिछले सीजन में सेमीफाइनल की दौड़ में केरल से एक रन की पहली पारी की बढ़त के कारण बाहर होना पड़ा था। इस बार टीम ने उस दर्दनाक याद को जीत में बदल दिया।

बल्लेबाजी और गेंदबाजी का शानदार प्रदर्शन

फाइनल में जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 584 रन बनाए, जो इस सीजन का उसका सर्वोच्च स्कोर रहा। शुबहम पुंडीर और कामरान इकबाल (शुभम खजूरिया की जगह अंतिम समय में शामिल) ने इस महत्वपूर्ण मैच में शतक जमाए।

गेंदबाजी में आकिब नबी ने करिश्माई प्रदर्शन करते हुए पहली पारी में 54 रन देकर पांच विकेट झटके। वह इस सीजन में 60 विकेट लेकर सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। पिछले सीजन में भी उनके नाम 44 विकेट थे, जिससे राष्ट्रीय टीम में चयन की मांग तेज हो गई है।

अब्दुल समद और कप्तान पारस डोगरा का योगदान

मध्यक्रम के बल्लेबाज अब्दुल समद ने इस सीजन 748 रन बनाकर टीम के लिए सर्वाधिक रन जुटाए। वहीं 41 वर्षीय कप्तान पारस डोगरा के लिए यह खिताब खास रहा। 153 प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले डोगरा रणजी ट्रॉफी में 10,000 से अधिक रन बनाने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं। इस सीजन उन्होंने 637 रन बनाए, जिसमें मुंबई और दिल्ली के खिलाफ शतक शामिल हैं।

परवेज रसूल की भविष्यवाणी हुई सच

पूर्व भारतीय खिलाड़ी परवेज रसूल ने फाइनल से पहले कहा था कि पहली बार फाइनल में पहुंचना ही राज्य के क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। अब खिताब जीतने के बाद जम्मू-कश्मीर क्रिकेट नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ने को तैयार है। यह जीत राज्य में क्रिकेट के भविष्य को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे