एशियन गेम्स में सोना जीतने वाली महिला कब्बड्डी खिलाड़ियों के इनाम पर सवाल
धर्मशाला, 30 सितंबर (हि.स.)। एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने वाली हिमाचल की बेटियों की जीत के बाद अब मिलने वाली पुरस्कार राशि को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश सरकार की मौजूदा खेल पुरस्कार नीति में एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता के लिए चार करोड़ रुपये निर्धारित हैं। लेकिन 12 सदस्यीय भारतीय महिला कबड्डी टीम में शामिल हिमाचल की चार खिलाड़ियों कप्तान पुष्पा राणा, रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर को सिर्फ 33.33-33.33 लाख रुपये देने की घोषणा हुई है। चारों को मिलाकर यह राशि करीब 1.33 करोड़ रुपये बैठती है। यही अंतर अब कप्तान पुष्पा राणा की कसक बनकर सामने आया है। सवाल यह है कि जब राज्य की खेल नीति में एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक के लिए चार करोड़ रुपये का प्रावधान है तो टीम स्पर्धा में देश को स्वर्ण दिलाने वाली हिमाचली बेटियों के हिस्से में यह राशि किस आधार पर तय हो रही है। सरकार की ओर से बताया गया है कि कब्बड्डी टीम के पुरस्कार की गणना 12 सदस्यीय टीम में खिलाड़ियों की भागीदारी के अनुपात में की गई है। ऐसे में चार हिमाचली खिलाड़ियों को 33.33 लाख रुपये देने की घोषणा हुई है।
सोना एक, सम्मान अलग क्यों : पुष्पा राणा
पुष्पा राणा का कहना है कि खिलाड़ियों ने देश के लिए वर्षों मेहनत की है। उनका सवाल यह है कि यदि स्वर्ण पदक की निर्धारित राशि चार करोड़ रुपये है तो टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली खिलाड़ियों के योगदान का सम्मान किस तरह किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि टीम में शामिल सभी खिलाड़ियों ने देश को स्वर्ण दिलाने में बराबर भूमिका निभाई है। ऐसे में पुरस्कार राशि को लेकर खिलाड़ियों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। पुष्पा की कसक केवल एशियन गेम्स की पुरस्कार राशि तक सीमित नहीं है। वर्ष 2025 में भारत को कबड्डी विश्व कप जिताने वाली हिमाचल की खिलाड़ियों को अब तक पुरस्कार राशि नहीं मिलने का मुद्दा भी वह उठा चुकी हैं। 2025 के कबड्डी विश्व कप की भारतीय विजेता टीम में हिमाचल की पुष्पा राणा समेत पांच खिलाड़ी शामिल थीं। उस समय हिमाचल कब्बड्डी संघ की ओर से भी खिलाड़ियों के लिए नकद पुरस्कार और नौकरी की मांग उठाई गई थी।
रेणुका को एक करोड़, कबड्डी की बेटियों को कब?
पुरस्कारों की तुलना में पुष्पा और उनकी साथी खिलाड़ियों के सामने एक और उदाहरण है। वर्ष 2025 में महिला क्रिकेट विश्व कप जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम की हिमाचली खिलाड़ी रेणुका सिंह ठाकुर के लिए मुख्यमंत्री ने एक करोड़ रुपये नकद पुरस्कार की घोषणा की थी। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार देश के लिए स्वर्ण जीतने वाली कबड्डी खिलाड़ियों का सवाल है कि उन्हें भी उपलब्धि के अनुरूप सम्मान कब मिलेगा। खासकर तब, जब पुष्पा राणा और उनकी साथी खिलाड़ी पहले ही विश्व कप और अब एशियन गेम्स में भारत को स्वर्ण दिला चुकी हैं।
हरियाणा में मिले हैं तीन करोड़
पड़ोसी राज्य हरियाणा में वर्ष 2023 के एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेताओं को तीन-तीन करोड़ रुपये नकद पुरस्कार दिए गए थे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्वर्ण पदक विजेताओं को तीन करोड़, रजत पदक विजेताओं को डेढ़ करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं को 75 लाख रुपये दिए थे। 2026 के एशियन गेम्स को लेकर हरियाणा के पंचायत एवं विकास मंत्री और अमेचर कबड्डी एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण लाल पंवार ने भी कहा है कि राज्य की स्वर्ण पदक विजेता कबड्डी टीमों के खिलाड़ियों को तीन-तीन करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
नौकरी की मांग फिर उठी
एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतकर लौटने के बाद पुष्पा राणा के लिए पुरस्कार के साथ रोजगार का सवाल भी अहम है। इससे पहले वह कह चुकी हैं कि खिलाड़ियों ने देश और प्रदेश के लिए अपना पूरा युवा जीवन खेल को दिया है, इसलिए खेल जीवन के बाद भविष्य की सुरक्षा भी जरूरी है। 2025 के कबड्डी विश्व कप के बाद भी पुष्पा समेत खिलाड़ियों ने सरकार के समक्ष नौकरी और सम्मानजनक पुरस्कार की मांग रखी थी। अब एशियन गेम्स में देश को स्वर्ण दिलाने के बाद पुष्पा राणा की नजर सरकार के अगले कदम पर है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

