पचपदरा रिफाइनरी से बदलेगी राजस्थान की आर्थिक तस्वीर
रोहित पारीक
राजस्थान के पश्चिम में रेतीला इलाका अब विकास का नया अध्याय लिखने जा रहा है। बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थापित पचपदरा रिफाइनरी केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला मेगा प्रोजेक्ट बनकर उभर रहा है। लगभग 80 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह रिफाइनरी आने वाले समय में राजस्थान को देश के प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में स्थापित कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 21 अप्रैल को यह रिफाइनरी देश को समर्पित करेंगे।
पचपदरा की रिफाइनरी को राजस्थान की आर्थिक संप्रभुता का नया अध्याय माना जा रहा है। जब यहां की चिमनियों से धुआं उठेगा, तो वह प्रदेश की खुशहाली और औद्योगिक क्रांति की नई इबारत लिखेगा। सालों तक 'पिछड़ा' कहलाने वाला यह रेगिस्तानी इलाका अब निवेश और तकनीक का वैश्विक केंद्र बनने की राह पर है। उम्मीद है कि जब यह प्रोजेक्ट अपनी पूरी रफ्तार पकड़ेगा, तो राजस्थान न केवल अपनी जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि 'मेक इन राजस्थान' के विजन को दुनिया भर में नई पहचान दिलाएगा।
इस परियोजना के शुरू होने के साथ ही न केवल औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी बल्कि रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास को भी नया आयाम मिलेगा। रिफाइनरी के साथ विकसित हो रहा पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। यहां प्लास्टिक, केमिकल और पैकेजिंग जैसी सहायक उद्योग इकाइयों के स्थापित होने की संभावनाएं हैं, जिससे एक मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार होगा। यह परियोजना केवल तेलशोधन तक सीमित नहीं है बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम करने में सहायक बनेगी।
पचपदरा की एचआरआरएल रिफाइनरी बड़ी रिफाइनरी है, जिसमें 26 प्रतिशत से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार होंगे। प्रति वर्ष 1 मिलियन मीट्रिक टन पेट्रोल और 4 मिलियन मीट्रिक टन डीजल के उत्पादन के साथ-साथ, यह प्रति वर्ष 1 मिलियन मीट्रिक टन पॉलीप्रोपाइलीन, 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएलडीपीई (लीनियर लो डेंसिटी पॉलीइथिलीन), 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एचडीपीई (हाई डेंसिटी पॉलीइथिलीन) और लगभग 0.4 मिलियन मीट्रिक टन बेंजीन, टोल्यून और ब्यूटाडीन का भी उत्पादन करेगी। ये उत्पाद परिवहन, फार्मा, पेंट, पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
देश में वर्तमान में 23 तेल रिफाइनरी हैं, जो दुनिया में चौथे नंबर का नेटवर्क है। इनमें 18 सरकारी, 3 निजी और दो ज्वाइंट वेंचर की रिफाइनरी शामिल हैं। भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता 258 मिलियन टन प्रति वर्ष है। राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थित एचआरआरएल 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता वाली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है। इसमें पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता 2.4 मिलियन मीट्रिक टन होगी, जो कुल उत्पादन का 26 प्रतिशत है।
रेतीले धोरों और सूखे परिदृश्य के लिए पहचाने जाना वाला पचपदरा इस रिफाइनरी के साथ देश के औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान बनाने की दहलीज पर खड़ा हो गया है। लगभग 80 हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रही यह रिफाइनरी परियोजना पश्चिमी राजस्थान के लिए आर्थिक क्रांति का आधार बन सकती है।
यह परियोजना एक व्यापक पेट्रोकेमिकल हब के रूप में विकसित की जा रही है। गुजरात के जामनगर और दाहेज की तर्ज पर पचपदरा में एकीकृत पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत प्लास्टिक, केमिकल, पैकेजिंग सहित कई सहायक उद्योग स्थापित होंगे, जिससे एक मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉम्प्लेक्स न केवल उत्पादन बढ़ाएगा बल्कि आयात पर निर्भरता भी घटाएगा।
रिफाइनरी परियोजना की कुल लागत बढ़कर करीब 79,459 करोड़ रुपये हो गई है। इसमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि 26 प्रतिशत हिस्सेदारी राजस्थान सरकार की है।
परियोजना के संचालन के बाद केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर प्रतिवर्ष लगभग 21 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है, जिसमें राजस्थान को करीब 4 हजार करोड़ रुपये की हिस्सेदारी प्राप्त होगी। यह ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता के साथ स्थापित किया गया है। इसमें पेट्रोल, डीजल के अलावा पॉलीप्रोपाइलीन, एलएलडीपीई, एचडीपीई, बेंजीन, टोल्यून और ब्यूटाडीन जैसे उत्पाद भी तैयार होंगे। कुल उत्पादन का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा पेट्रोकेमिकल उत्पादों का होगा, जो उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराएगा।
रिफाइनरी को सालाना 9 मिलियन टन क्रूड ऑयल की आवश्यकता होगी, जिसमें से 7.5 मिलियन टन आयातित होगा। इसके लिए गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से पचपदरा तक 485 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। साथ ही सड़क और रेल नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और उद्योगों को गति मिलेगी।
इस परियोजना से करीब 10 हजार प्रत्यक्ष और 40 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। जोधपुर, पाली और बालोतरा सहित आसपास के क्षेत्रों में शहरीकरण तेज होगा। होटल, रियल एस्टेट और पर्यटन उद्योग को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
रिफाइनरी के आसपास राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम द्वारा पांच नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल के तहत तैयार फैक्ट्री शेड और लगभग 800 औद्योगिक भूखंड निवेशकों को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया आसान होगी।
परियोजना की शुरुआत 2013 में हुई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसमें देरी हुई, जिससे लागत लगभग दोगुनी हो गई। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सवाल उठाए थे। वहीं, वर्तमान सरकार का दावा है कि अब परियोजना तेजी से अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही उत्पादन शुरू होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह रिफाइनरी पश्चिमी राजस्थान के आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकती है। जिस तरह मध्य-पूर्व के देशों में तेल संसाधनों ने विकास को गति दी, उसी तरह पचपदरा परियोजना भी मरुधरा को औद्योगिक समृद्धि की ओर ले जा सकती है। यह परियोजना जहां एक ओर रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा करेगी, वहीं प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि पचपदरा, राजस्थान का ‘जामनगर’ बनकर उभरेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

