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महिला सशक्तिकरण निरंतर प्रयास से ही संभव : वंदना मिश्रा

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महिला सशक्तिकरण निरंतर प्रयास से ही संभव : वंदना मिश्रा


यमुनानगर, 07 मार्च (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मनोवैज्ञानिक वंदना मिश्रा ने कहा है कि महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि समाज के लिए अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना एक सतत सामाजिक प्रक्रिया है, जिसे केवल एक दिन के कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।

वंदना मिश्रा ने शनिवार काे कहा कि महिलाएं समाज की आधी आबादी हैं और परिवार की संरचना में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। एक महिला मां, बहन, बेटी और पत्नी के रूप में परिवार को मजबूती प्रदान करती है। इसलिए महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध करवाना समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण की बात तो व्यापक स्तर पर की जाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि आज भी कई महिलाएं अपने सपनों को पूरा करने के लिए आवश्यक अवसरों से वंचित रह जाती हैं।

सामाजिक परंपराएं, पारिवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक परिस्थितियां कई बार उनके मार्ग में बाधा बन जाती हैं। इसके बावजूद जो महिलाएं दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती हैं, वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य हासिल करने में सफल होती हैं। पिछले कई वर्षों से बच्चों और महिलाओं से जुड़े सामाजिक कार्यों में सक्रिय वंदना मिश्रा का मानना है कि महिला दिवस का उद्देश्य महिलाओं के प्रति सम्मान और समान अवसर की भावना को मजबूत करना होना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी बहू पेशे से सर्जन हैं और महिला मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। समय-समय पर आयोजित नि:शुल्क चिकित्सा शिविरों के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को उपचार और परामर्श उपलब्ध करवाया जाता है। उन्होंने कहा कि समाज की जरूरतमंद महिलाओं की सेवा से उन्हें गर्व और संतोष की अनुभूति होती है। वंदना मिश्रा के अनुसार महिलाओं की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि महिला दिवस तभी सार्थक होगा, जब हर महिला को सम्मान और समान अवसर प्राप्त होंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार