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बीएचयू के दंत विज्ञान संकाय की बड़ी उपलब्धि: नया ‘स्मार्ट एडहेसिव’ ब्रेसेस देगा दांतों को सुरक्षा

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बीएचयू के दंत विज्ञान संकाय की बड़ी उपलब्धि: नया ‘स्मार्ट एडहेसिव’ ब्रेसेस देगा दांतों को सुरक्षा


बीएचयू के दंत विज्ञान संकाय की बड़ी उपलब्धि: नया ‘स्मार्ट एडहेसिव’ ब्रेसेस देगा दांतों को सुरक्षा


— एडहेसिव ब्रेस को थामे रखते हुए दांतों को पुनर्निर्मित करने में भी करेगा मदद

वाराणसी, 14 मई (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के दंत विज्ञान संकाय के शोधकर्ताओं ने दंत चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शोध टीम ने एक पेटेंट प्राप्त “स्मार्ट एडहेसिव” विकसित किया है, जो ऑर्थोडॉन्टिक ब्रेसेस को मजबूती से थामे रखने के साथ-साथ दांतों के इनेमल के पुनर्निर्माण में भी मदद करेगा। यह तकनीक दांतों को हानिकारक जीवाणुओं से बचाने और ब्रेस हटाने की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित तथा कम नुकसानदेह बनाने में सक्षम मानी जा रही है।

शोध का नेतृत्व कर रहे प्रो. अजित विक्रम परिहार ने गुरुवार को बताया कि इस आविष्कार का शीर्षक “ऑर्थोडॉन्टिक बॉन्डिंग के लिए एक संरचना और उसकी तैयारी की विधि” है। यह नया एडहेसिव मेसोपोरस बायोएक्टिव ग्लास पर आधारित है, जिसमें स्ट्रोंशियम खनिज मिलाया गया है। यह सामग्री पहले से हड्डी की मरम्मत संबंधी सर्जरी में उपयोग की जाती रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में प्रयोग होने वाले रेजिन-आधारित एडहेसिव केवल ब्रैकेट को दांतों से चिपकाए रखते हैं, जबकि नया स्मार्ट एडहेसिव दांतों के साथ सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया करता है। यह लार में कैल्शियम और फॉस्फेट आयन छोड़कर इनेमल की सतह पर खनिजयुक्त परत विकसित करता है, जिससे दांत मजबूत बने रहते हैं।

—व्हाइट स्पॉट लीजन से भी बचाव

ऑर्थोडॉन्टिक उपचार के दौरान अक्सर ब्रैकेट के आसपास “व्हाइट स्पॉट लीजन” विकसित हो जाते हैं। ये दांतों की सड़न का शुरुआती संकेत माने जाते हैं और इनेमल क्षरण के कारण दिखाई देते हैं। शोधकर्ताओं का दावा है कि नया एडहेसिव लगातार खनिजों की पूर्ति कर इस समस्या को काफी हद तक रोक सकता है। शोध टीम ने इस तकनीक के सात अलग-अलग फॉर्मूलों का परीक्षण 96 निकाले गए मानव प्रीमोलर दांतों पर किया। इनमें सबसे प्रभावी फॉर्मूला 7 प्रतिशत स्ट्रोंशियम नाइट्रेट और 68 प्रतिशत कैल्शियम नाइट्रेट वाला पाया गया। इसकी प्रारंभिक बॉन्ड शक्ति 9.91 MPa दर्ज की गई, जो बाजार में उपलब्ध व्यावसायिक एडहेसिव के लगभग बराबर रही।

सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह रहा कि छह महीने तक कृत्रिम मौखिक परिस्थितियों और एसिड-रिकवरी चक्रों के बाद भी इसकी बॉन्ड शक्ति 7.52 MPa बनी रही, जबकि सामान्य व्यावसायिक एडहेसिव घटकर 4.49 MPa पर पहुंच गया।

—इनेमल को कम नुकसान

स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से किए गए परीक्षणों में यह सामने आया कि नए एडहेसिव ने ब्रैकेट और दांत के बीच खनिजयुक्त सुरक्षात्मक परत विकसित कर दी थी। वहीं, पारंपरिक एडहेसिव में ऐसा प्रभाव नहीं देखा गया। डीबॉन्डिंग परीक्षणों में भी सकारात्मक परिणाम मिले। शोधकर्ताओं के अनुसार नया एडहेसिव हटाने के बाद अधिक अवशेष ब्रैकेट पर छोड़ता है, जिससे दांतों की सतह पर कम खुरचाई करनी पड़ती है और इनेमल को नुकसान का खतरा घट जाता है।

—रोगाणुरोधी प्रभाव भी सामने आए

शोध में यह भी पाया गया कि अधिक स्ट्रोंशियम वाले फॉर्मूले कुछ हानिकारक जीवाणुओं और फफूंद की वृद्धि को रोकने में सक्षम रहे। कन्फोकल माइक्रोस्कोपी परीक्षणों में रोगाणु कोशिकाओं की झिल्लियों में दरारें तक देखी गईं। इस एडहेसिव को विकसित करने के लिए शोधकर्ताओं ने उन्नत “सोल-जेल” तकनीक का उपयोग किया। इसमें तैयार ग्लास पाउडर को 650 डिग्री सेल्सियस पर गर्म कर ऑर्थोडॉन्टिक प्राइमर रेजिन के साथ मिलाकर पेस्ट तैयार किया गया।

हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह अभी प्रारंभिक “इन-विट्रो” अध्ययन है, जो जीवित मरीजों के बजाय निकाले गए दांतों पर किया गया है। इसे व्यापक स्तर पर दंत चिकित्सालयों में उपयोग से पहले बड़े नैदानिक परीक्षणों से गुजरना होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी