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बीएचयू ने विकसित की धान की नई किस्म 'मालवीय धान-3', 15 वर्ष लगा समय

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बीएचयू ने विकसित की धान की नई किस्म 'मालवीय धान-3', 15 वर्ष लगा समय


— इस किस्म की पूरे देश में औसत उपज 60.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

वाराणसी, 09 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान ने धान अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग ने अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) के सहयोग से 15 वर्षों के सतत अनुसंधान के बाद धान की नई उच्च उत्पादक किस्म ‘मालवीय धान-3’ विकसित की है।

विभागाध्यक्ष प्रो. श्रवण कुमार सिंह के नेतृत्व में विकसित इस नई किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ‘अखिल भारतीय समन्वित धान अनुसंधान परियोजना’ के तहत देशभर में तीन वर्षों तक परीक्षण किया गया। परीक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर 17-18 अप्रैल 2026 को केंद्रीय धान अनुसंधान संस्थान में आयोजित ‘61वीं वार्षिक धान अनुसंधान ग्रुप मीटिंग’ की ‘वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी’ ने ‘मालवीय धान-3’ को स्वीकृति प्रदान कर दी।

कृषि मंत्रालय, भारत सरकार से अधिसूचना जारी होने के बाद अगले वर्ष से यह किस्म किसानों के लिए उपलब्ध हो सकेगी। आईसीएआर की समिति ने इस किस्म को बिहार, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों के लिए उपयुक्त माना है।

‘मालवीय धान-3’ की औसत उत्पादकता 60.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय मानक किस्म ‘एनडीआर-359’ की तुलना में 18.19 प्रतिशत अधिक है। इसका उत्पादन रेंज 59.89 से 61.03 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहा। धान की इस नई किस्म का हलिंग प्रतिशत 79.8, मिलिंग प्रतिशत 70.6 तथा खड़ा चावल प्रतिशत (एचआरआर) 58.5 है। इसका चावल पतला एवं लंबा (6.7 मिमी × 2.2 मिमी) तथा एमाइलोज प्रतिशत 24.1 है, जिससे इसकी गुणवत्ता बेहतर मानी जा रही है।

—किस्म मध्यम बौनी श्रेणी

यह किस्म मध्यम बौनी श्रेणी की है, जिसकी ऊंचाई 114 से 120 सेंटीमीटर तक होती है और यह रोपाई विधि में 132 से 139 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। रोग एवं कीट प्रतिरोधक क्षमता के लिहाज से यह लीफ ब्लास्ट और बैक्टीरियल ब्लाइट के प्रति मध्यम प्रतिरोधी, नेक ब्लास्ट के प्रति प्रतिरोधी तथा प्लांट हॉपर के प्रति मध्यम सहनशील पाई गई है।

‘मालवीय धान-3’ के विकास में डॉ. आकांक्षा सिंह, डॉ. धीरेंद्र कुमार सिंह, डॉ. राकेश कुमार सिंह, डॉ. निखिल कुमार सिंह सहित इरी फिलीपींस के वैज्ञानिक डॉ. विकास कुमार सिंह, डॉ. संकल्प भोसले, डॉ. पल्लवी सिन्हा, डॉ. चल्ला वेंकटस्वरलू तथा भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान के डॉ. साईं प्रसाद का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी