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उत्तराखंड की राजनीति में बदला सियासी दस्तूर, टूटी परंपराएं

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उत्तराखंड की राजनीति में बदला सियासी दस्तूर, टूटी परंपराएं


-नेतृत्व परिवर्तन की परिपाटी खत्म, धामी के नेतृत्व में चुनाव की तैयारी

देहरादून, 20 मार्च (हि.स.)। उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से चली आ रही नेतृत्व परिवर्तन की परंपरा में बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। कार्यकाल के अंतिम वर्ष में मुख्यमंत्री बदलने की परिपाटी, जो दूसरी विधानसभा से लगभग स्थापित मानी जाती रही, मौजूदा परिदृश्य में कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस बदलाव के केंद्र में देखा जा रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करते हुए उन्होंने जीत दिलाई, हालांकि वे स्वयं खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे। इसके बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री बनाए रखा गया, जो राज्य की राजनीति में एक अलग उदाहरण रहा। राज्य के राजनीतिक इतिहास में दूसरी, तीसरी और चौथी विधानसभा के दौरान चुनाव से पूर्व नेतृत्व परिवर्तन की घटनाएं सामने आती रही हैं। भुवन चंद्र खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, हरीश रावत, त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत जैसे नेताओं के कार्यकाल में चुनाव से पहले नेतृत्व परिवर्तन हुआ था। वर्ष 2021 में नेतृत्व परिवर्तन के बाद पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया गया और उनके नेतृत्व में भाजपा ने 2022 का चुनाव जीता। यह भी राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव रहा, क्योंकि इससे पहले किसी एक दल को लगातार दूसरी बार स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था।

हाल ही में मंत्रिमंडल में पांच नए चेहरों को शामिल किए जाने को राजनीतिक विश्लेषक नेतृत्व में स्थिरता के संकेत के रूप में देख रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व धामी पर भरोसा बनाए हुए है और आगामी विधानसभा चुनाव भी उनके नेतृत्व में लड़े जाने की संभावना मजबूत हुई है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय