दो दिन, कई संदेश : संगठन से सैनिक, पंजाबी समाज और युवाओं तक नितिन नवीन
हल्द्वानी, 10 सितंबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का उत्तराखंड का दो दिवसीय दौरा केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत, सैनिक सम्मान, सिख समाज और युवा संवाद को जोड़ते हुए इस दौरे में पार्टी ने उत्तराखंड के अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने का संदेश दिया। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसे संगठन के साथ सामाजिक विस्तार की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तराखंड दौरे के पहले दिन पार्टी संगठन की बैठकों पर मुख्य फोकस रहा। बैठकों में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी, बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में बेहतर समन्वय पर जोर दिखाई दिया। भाजपा के लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने और दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य को देखते हुए इन बैठकों को चुनावी रणनीति की शुरुआती कड़ी माना जा रहा है। राष्ट्रीय नेतृत्व ने संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय रखने का संदेश दिया।
दूसरे दिन की शुरुआत महालक्ष्मी मंदिर में पूजा-अर्चना और पंडित गोविंद बल्लभ पंत को श्रद्धांजलि से हुई। इसके बाद पूर्व सैनिक सम्मेलन में सैनिकों के सम्मान और उत्तराखंड की ‘वीरभूमि’ पहचान को प्रमुखता दी गई। यह संदेश महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में सैनिक परिवारों और पूर्व सैनिकों की बड़ी सामाजिक मौजूदगी है। पूर्व सैनिक सम्मेलन में नवीन ने सैनिकों को देश की सुख-शांति और स्वतंत्रता का आधार बताया। वन रैंक वन पेंशन, सेना के आधुनिकीकरण, सीमांत गांवों और सैन्य धाम जैसे विषयों का उल्लेख किया गया। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी उत्तराखंड को ‘पंचम धाम’ यानी सैन्य धाम की भूमि बताते हुए सैनिकों की भूमिका को रेखांकित किया। इससे भाजपा की उस राजनीतिक कोशिश का संकेत मिलता है जिसमें उत्तराखंड की पहचान को देवभूमि के साथ वीरभूमि के रूप में भी लगातार सामने रखा जा रहा है।
दौरे का एक महत्वपूर्ण आयाम पंजाबी गौरव सम्मेलन रहा। नानकमत्ता साहिब की पावन धरती का उल्लेख करते हुए सिख गुरुओं के त्याग और बलिदान की परंपरा को सम्मान देने का संदेश दिया गया। नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलकर ऐतिहासिक गलती को सुधारा गया। उन्होंने सिख नरसंहार के मामलों में एसआईटी गठित किए जाने, हेमकुंड साहिब के लिए रोप-वे परियोजना और पंजाब समेत देश को नशामुक्त करने के संकल्प का भी उल्लेख किया। यहां राजनीतिक संदेश केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं दिखता। पंजाब और उत्तराखंड के बीच धार्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए भाजपा ने सिख समाज के साथ संवाद और जुड़ाव को भी प्रमुखता दी। नानकमत्ता साहिब का संदर्भ इस पूरे विमर्श को उत्तराखंड की स्थानीय सामाजिक पृष्ठभूमि से जोड़ता है।
दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ युवा संवाद कार्यक्रम ने भाजपा की रणनीति का एक और पक्ष सामने रखा। करियर, रोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और उत्तराखंड के भविष्य जैसे विषयों पर युवाओं से संवाद के जरिए पार्टी ने नई पीढ़ी को सीधे राजनीतिक संवाद के केंद्र में रखा। उत्तराखंड में रोजगार और पलायन लंबे समय से प्रमुख मुद्दे रहे हैं। ऐसे में युवा संवाद का महत्व केवल कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। भाजपा के लिए चुनौती यह है कि विकास और रोजगार से जुड़े उसके दावों को युवाओं की अपेक्षाओं से जोड़ा जाए और उन्हें संगठन तथा राजनीतिक अभियान से जोड़ा जा सके।
दौरे के दौरान भाजपा संगठन की बैठकों और कार्यकर्ताओं से संवाद को भी प्रमुखता मिली। पार्टी ने 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने और दो-तिहाई बहुमत हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर रखना और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा।
नितिन नवीन का दौरा इसी चुनावी तैयारी की शुरुआती तस्वीर पेश करता है। धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लेकर सैनिकों, सिख समाज और युवाओं तक पहुंच बनाने का प्रयास बताता है कि पार्टी चुनावी रणनीति को केवल राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रखना चाहती।
नितिन नवीन के दो दिवसीय दौरे को एक साथ देखें तो इसकी सबसे बड़ी विशेषता कार्यक्रमों की विविधता है—मंदिर, पंत की विरासत, सैनिक, सिख समाज और युवा। ये सभी उत्तराखंड के अलग-अलग सामाजिक और सांस्कृतिक समूहों से जुड़े विषय हैं। इस लिहाज से दौरे का संदेश केवल भाजपा संगठन को सक्रिय करने तक सीमित नहीं दिखता। पार्टी उत्तराखंड की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान, सैन्य परंपरा, पंजाबी-सिख समाज और युवा वर्ग को एक व्यापक राजनीतिक संवाद में जोड़ने की कोशिश करती नजर आई।
दौरे के दौरान कांग्रेस ने भाजपा के संगठन, सरकार के कामकाज और सामाजिक मुद्दों को लेकर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भाजपा के भीतर कथित गुटबाजी का मुद्दा उठाने के साथ रोजगार, महंगाई, पलायन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विषयों पर सरकार को घेरा। इस तरह नवीन का दौरा भाजपा के लिए जहां संगठन और सामाजिक संपर्क बढ़ाने का अवसर रहा, वहीं कांग्रेस को भी जवाबी राजनीतिक नैरेटिव खड़ा करने का मौका मिला।
अब चुनौती इस संदेश को जमीन पर संगठनात्मक ताकत और जनसमर्थन में बदलने की है। 2027 के चुनाव में भाजपा की घोषित ‘हैट्रिक’ की राह में यही सामाजिक पहुंच और बूथ स्तर की सक्रियता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

