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जागीरोड में टाटा का सेमीकंडक्टर प्लांट असम की अर्थव्यवस्था को देगा नई रफ्तार

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जागीरोड में टाटा का सेमीकंडक्टर प्लांट असम की अर्थव्यवस्था को देगा नई रफ्तार


गुवाहाटी, 06 सितंबर (हि.स.)। मोरीगांव जिले के जागीरोड में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर से स्थापित किया जा रहा 27,000 करोड़ रुपये का सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट प्लांट असम ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से राज्य में हाईटेक विनिर्माण को बढ़ावा मिलने, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होने और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े सहायक उद्योगों के विकास की उम्मीद है। साथ ही, यह परियोजना पूर्वोत्तर को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

असम सरकार के मंत्री पीयूष हजारिका ने एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद बातचीत के दौरान कहा कि जागीरोड में स्थापित हो रहा यह संयंत्र असम की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित होने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी हाईटेक परियोजना के आने से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी और असम देश के उभरते सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

171 एकड़ भूमि पर विकसित हो रहा संयंत्र

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का यह संयंत्र पूर्ववर्ती नगांव पेपर मिल की करीब 171 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है। इसे भारत की पहली स्वदेशी ग्रीनफील्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट सुविधा के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना का लक्ष्य देश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है।

योजना के अनुसार, संयंत्र में वर्ष 2026 के दौरान ही वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया जाना है। यहां वायर बॉन्ड, फ्लिप चिप और इंटीग्रेटेड सिस्टम्स पैकेजिंग (आईएसपी) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। संयंत्र की प्रस्तावित क्षमता प्रतिदिन करीब 4.8 करोड़ सेमीकंडक्टर चिप्स तक होगी। इतनी बड़ी उत्पादन क्षमता के साथ यह संयंत्र देश की सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग क्षमता में उल्लेखनीय योगदान दे सकता है।

27 हजार से अधिक रोजगार के अवसर

परियोजना का सबसे बड़ा प्रभाव रोजगार के क्षेत्र में पड़ने की उम्मीद है। इससे 27,000 से अधिक प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। इससे असम और पूर्वोत्तर के स्थानीय युवाओं को हाईटेक उद्योग में रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

सेमीकंडक्टर उद्योग में इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीन संचालन, गुणवत्ता नियंत्रण, तकनीकी रखरखाव, परीक्षण, लॉजिस्टिक्स और अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। ऐसे में इस परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि तकनीकी कौशल विकसित करने के अवसर भी बढ़ेंगे।

इसके साथ ही संयंत्र के आसपास तकनीकी प्रशिक्षण केंद्रों और कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय कार्यबल को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।

सहायक उद्योगों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी मिलेगा लाभ

बड़े सेमीकंडक्टर संयंत्र के विकास का असर केवल मुख्य परियोजना तक सीमित नहीं रहता। इसके लिए कच्चे माल, कंपोनेंट, पैकेजिंग, परिवहन, भंडारण, मशीनरी रखरखाव और तकनीकी सेवाओं की जरूरत होती है। इससे आसपास छोटे-बड़े सहायक उद्योगों के विकसित होने की संभावना रहती है।

जागीरोड परियोजना के आसपास वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े साझेदारों और कंपोनेंट निर्माताओं के आने से असम में अतिरिक्त निवेश आकर्षित हो सकता है। लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विस्तार के साथ परिवहन, वेयरहाउसिंग और अन्य सेवा क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

इस प्रकार यह परियोजना जागीरोड को केवल एक विनिर्माण केंद्र ही नहीं, बल्कि भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े व्यापक औद्योगिक क्लस्टर के रूप में विकसित करने का आधार तैयार कर सकती है।

इलेक्ट्रिक वाहन और दूरसंचार क्षेत्र को मिलेगा समर्थन

आज सेमीकंडक्टर लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी उत्पाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इलेक्ट्रिक वाहन, दूरसंचार उपकरण, नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक मशीनरी और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियां चिप्स पर निर्भर हैं।

जागीरोड संयंत्र में तैयार होने वाले सेमीकंडक्टर उत्पादों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, दूरसंचार और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होने की उम्मीद है। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते बाजार और देश में डिजिटल एवं दूरसंचार ढांचे के विस्तार के बीच घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमता बढ़ाना रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।

आयातित चिप्स पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम

दरअसल, सेमीकंडक्टर को आधुनिक अर्थव्यवस्था की बुनियादी जरूरतों में से एक माना जाता है। मोबाइल फोन से लेकर ऑटोमोबाइल, कंप्यूटर, दूरसंचार उपकरण और औद्योगिक प्रणालियों तक, इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े विनिर्माण और परीक्षण की क्षमता विकसित करना देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जागीरोड की परियोजना घरेलू स्तर पर चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग क्षमता को मजबूत कर सकती है तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी तरह के व्यवधान की स्थिति में भारत की निर्भरता को कम करने में मदद कर सकती है।

जापान, अमेरिका और जर्मनी तक पहुंचने की संभावना

जानकारों का मानना है कि जागीरोड में बनने वाले उत्पादों के लिए भारत के बड़े घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी संभावनाएं हैं। जापान, अमेरिका और जर्मनी जैसे प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी बाजारों में इन उत्पादों के निर्यात की संभावना परियोजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बनाती है। यदि उत्पादन वैश्विक मानकों के अनुरूप बड़े पैमाने पर होता है तो असम से हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। इससे राज्य के औद्योगिक आधार और निर्यात क्षमता में भी विस्तार की संभावना है।

पूर्वोत्तर के औद्योगिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव

पूर्वोत्तर भारत में लंबे समय से बड़े पैमाने के औद्योगिक निवेश और आधुनिक विनिर्माण क्षमता के विस्तार की जरूरत महसूस की जाती रही है। ऐसे में जागीरोड में 27,000 करोड़ रुपये का निवेश क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिहाज से विशेष महत्व रखता है। इस परियोजना की सफलता से अन्य घरेलू और वैश्विक कंपनियों को भी पूर्वोत्तर में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे क्षेत्र में नए औद्योगिक क्लस्टर, सहायक उद्योग, कौशल विकास केंद्र और आधुनिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित होने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

जागीरोड की परियोजना असम को पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़ाकर हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बड़े निवेश के साथ रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण, सहायक उद्योग और निर्यात की संभावनाएं मिलकर राज्य में एक नया औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार कर सकती हैं।

कुल मिलाकर, 27,000 करोड़ रुपये की टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स परियोजना असम के लिए एक बड़े औद्योगिक परिवर्तन की शुरुआत साबित हो सकती है। इससे राज्य को भारत के हाईटेक विनिर्माण मानचित्र पर मजबूत स्थान मिलने के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने का अवसर मिलेगा। परियोजना के निर्धारित समय के अनुसार वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने और इसके आसपास सहायक उद्योगों का विस्तार होने के साथ असम की अर्थव्यवस्था, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को दीर्घकालिक गति मिलने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश