home page

विशेष : शुभेंदु सरकार के 100 दिन: सीमा सुरक्षा से चटकलों, अन्नपूर्णा-आयुष्मान से निवेश तक बहुत कुछ बदला

 | 
विशेष : शुभेंदु सरकार के 100 दिन: सीमा सुरक्षा से चटकलों, अन्नपूर्णा-आयुष्मान से निवेश तक बहुत कुछ बदला


कोलकाता, 18 अगस्त (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने मंगलवार को अपने 100 दिन पूरे कर लिए। सरकार ने इन 100 दिनों की उपलब्धियों का विभागवार लेखा-जोखा तैयार किया है। सत्ता पक्ष इसे चुनावी वादों को तेजी से जमीन पर उतारने का उदाहरण बता रहा है। वहीं, कुछ योजनाओं के क्रियान्वयन, लाभार्थियों की संख्या और जमीनी असर को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। ऐसे में सरकार के पहले 100 दिनों को देखें तो सीमा सुरक्षा, आधारभूत ढांचा, बंद चटकलों को खोलना, महिलाओं को आर्थिक सहायता, केंद्रीय योजनाओं का विस्तार और निवेश आकर्षित करना प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने आते हैं।

शुभेंदु सरकार की सबसे चर्चित पहल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर जमीन उपलब्ध कराने का फैसला शामिल है। भाजपा लंबे समय से आरोप लगाती रही थी कि राज्य सरकार की ओर से जमीन उपलब्ध नहीं कराने के कारण कई हिस्सों में सीमा पर बाड़ लगाने का काम अटका हुआ है। सत्ता में आने के बाद नई सरकार ने सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बीएसएफ को बड़े पैमाने पर जमीन हस्तांतरित की। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के नौ सीमावर्ती जिलों में 767 एकड़ से अधिक जमीन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को दी जा चुकी है, जबकि करीब 362 एकड़ अतिरिक्त जमीन के हस्तांतरण को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। इस तरह बीएसएफ को उपलब्ध कराई गई जमीन का कुल क्षेत्रफल 1100 एकड़ से अधिक हो गया है।

सीमा सुरक्षा के लिए दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में 44 एकड़ से अधिक जमीन सशस्त्र सीमा बल को भी दी गई है। दार्जिलिंग में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की बटालियन का मुख्यालय बनाने के लिए करीब 110 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बड़ा कदम बता रही है।

भूमि विभाग ने आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के लिए भी जमीन उपलब्ध कराने में तेजी दिखाई है। सेवक-रंगपो ब्रॉडगेज रेल परियोजना के लिए रेलवे को 20 एकड़ जमीन दी गई है। पश्चिम मेदिनीपुर में 100 बिस्तरों वाले ईएसआई अस्पताल के निर्माण के लिए करीब छह एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा सरकारी गोदाम, बिजली उपकेंद्र और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के लिए भी जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज की गई है।

सरकार के 100 दिनों की सबसे चर्चित आधारभूत ढांचा परियोजनाओं में चिंगड़ीघाटा मेट्रो परियोजना का काम भी शामिल है। लंबे समय से अटका यह काम नई सरकार के निर्देश के बाद तेजी से आगे बढ़ा। निर्माण एजेंसी आरवीएनएल के साथ समन्वय करते हुए मई में दो सप्ताहांत पर चिंगड़ीघाटा मोड़ पर यातायात नियंत्रित किया गया और वायाडक्ट लगाने का काम पूरा किया गया। इसके बाद बेलेघाटा और गौरकिशोर घोष स्टेशनों के बीच रेल संपर्क का काम आगे बढ़ा। भाजपा इसे प्रशासनिक इच्छाशक्ति का उदाहरण बता रही है।

रोजगार के मोर्चे पर बंद चटकलों को दोबारा खोलने का दावा सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में है। श्रम विभाग के अनुसार, हुगली नदी के दोनों किनारों पर पिछले 100 दिनों में 16 बंद चटकलें दोबारा खुली हैं। सरकार का दावा है कि इससे 35 हजार से अधिक श्रमिकों की आजीविका फिर से सुरक्षित हुई है। लंबे समय से संकट से जूझ रहे राज्य के जूट उद्योग के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

परिवहन क्षेत्र में भी सरकार ने चुनावी वादे को लागू करने की कोशिश की है। सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा शुरू की गई है। इसके साथ ही कई मार्गों पर नई सरकारी बसें उतारी गई हैं। हालांकि, सरकारी बसों की संख्या अभी भी जरूरत के मुकाबले कम होने की बात कही जा रही है। इसलिए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह पटरी पर लाने के लिए आगे और बड़े कदम उठाने की चुनौती सरकार के सामने है।

महिलाओं के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ सरकार की प्रमुख चुनावी घोषणाओं में थी। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये दिए जा रहे हैं। भाजपा इसे चुनावी वादे को पूरा करने का उदाहरण बता रही है। हालांकि, योजना के आवेदन की जटिल प्रक्रिया और कई पात्र महिलाओं को अब तक लाभ नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। 12 से 13 पन्नों के आवेदन पत्र को लेकर भी सवाल उठे हैं। सरकार का कहना है कि फर्जी लाभार्थियों को हटाने और वास्तविक पात्र लोगों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया अपनाई गई है।

स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में लागू करना भी नई सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना को राज्य में लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। सरकार ने इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए केंद्र के साथ समझौते भी किए हैं। हालांकि, आने वाले समय में इन योजनाओं का वास्तविक लाभ कितने लोगों तक पहुंचता है, यह सरकार के लिए बड़ी कसौटी होगी।

किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों का दायरा बढ़ाने और अन्य केंद्रीय योजनाओं को राज्य में तेजी से लागू करने को भाजपा सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि मान रही है। केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने का लाभ इन योजनाओं के क्रियान्वयन में मिलने का दावा भी सत्ता पक्ष कर रहा है।

कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी सरकार के 100 दिनों के एजेंडे में महत्वपूर्ण रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कई मौकों पर राज्य में कानून का शासन स्थापित होने का दावा किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी गैरकानूनी गतिविधियों के आरोप लगते हैं तो कानून अपना काम करेगा। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों की ओर से कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सरकार के समर्थकों का दावा है कि पिछले 100 दिनों में पुलिस और प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर पहले जैसी व्यापक शिकायतें सामने नहीं आई हैं।

निवेश के मोर्चे पर भी सरकार अपने पहले 100 दिनों को उपलब्धियों से भरा बता रही है। कपड़ा उद्योग में बड़े निवेश की परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ है। हावड़ा में अमूल के बड़े डेयरी संयंत्र की आधारशिला रखी गई है। इस्पात उद्योग में भी निवेश की परियोजनाएं सामने आई हैं। सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर पुरुलिया में इस्पात क्षेत्र से जुड़ी एक और परियोजना का शिलान्यास प्रस्तावित है, जिसमें मुख्यमंत्री के शामिल होने की बात कही गई है।

इन 100 दिनों में सरकार ने कई मोर्चों पर अपने चुनावी एजेंडे को तेजी से लागू करने का प्रयास किया है। सीमा पर जमीन हस्तांतरण से लेकर चिंगड़ीघाटा मेट्रो, बंद चटकलों को खोलने, महिलाओं को आर्थिक सहायता और केंद्रीय योजनाओं के विस्तार तक सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। लेकिन इन कदमों की असली परीक्षा अब शुरू होगी। योजनाएं कितनी स्थायी साबित होती हैं, कितने लोगों तक उनका लाभ पहुंचता है, रोजगार और निवेश के दावे जमीन पर कितना असर डालते हैं और सरकारी घोषणाओं का आम लोगों के जीवन पर कितना प्रभाव पड़ता है, इन्हीं सवालों से शुभेंदु सरकार के अगले 100 दिनों और पूरे कार्यकाल का मूल्यांकन तय होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर