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सूरत में ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर विवादः मनपा बोली- हमने नहीं तोड़े मकान, विधायक ने पूछा- फिर 100 घर ढहाए किसने?

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सूरत में ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर विवादः मनपा बोली- हमने नहीं तोड़े मकान, विधायक ने पूछा- फिर 100 घर ढहाए किसने?


सूरत, 06 जून (हि.स.)। सूरत के कतारगाम स्थित नासिरनगर में ध्वस्तीकरण(डिमोलिशन) कार्रवाई पर विवाद गहराता जा रहा है। यहां करीब 100 मकानों को बुलडोजर से ढहा दिए जाने के बावजूद सूरत महानगर पालिका, पुलिस और जनप्रतिनिधियों के बयानों में विरोधाभास सामने आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि महानगर पालिका ने यह कार्रवाई नहीं की, तो इतने बड़े पैमाने पर मकान किसने तोड़े?

कतारगाम के भाजपा विधायक विनु मोरड़िया ने कहा कि उन्होंने इस मामले में सूरत महानगरपालिका के सेंट्रल जोन के अधिकारियों से जानकारी मांगी थी। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि निगम की टीम केवल रोड लाइन और सीमांकन (डिमार्केशन) की कार्रवाई के लिए मौके पर गई थी। मनपा की ओर से किसी प्रकार के ध्वस्तीकरण का आदेश नहीं दिया गया था और न ही ऐसी कोई कार्रवाई आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है।

विधायक ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि यदि निगम ने मकान नहीं तोड़े, तो फिर जेसीबी और हिटाची मशीनों के साथ पूरे क्षेत्र में तोड़फोड़ किसने की? उन्होंने इस मामले में किसी भूमि माफिया या बिल्डर लॉबी की संलिप्तता की आशंका भी जताई और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

स्थानीय लोगों ने पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ध्वस्तीकरण के दौरान पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे। लोगों का कहना है कि जब उनके घर तोड़े जा रहे थे, तब पुलिस मूकदर्शक बनी रही। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि कार्रवाई अधिकृत नहीं थी, तो पुलिस ने ध्वस्तीकरण करने वालों से कोई दस्तावेज या आदेश क्यों नहीं मांगा।

स्थायी समिति चेयरमैन ने कही जांच की बात

सूरत महानगरपालिका की स्थायी समिति के चेयरमैन राजन पटेल ने कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महानगर पालिका की ओर से केवल डिमार्केशन की कार्रवाई की गई थी। इसके लिए पुलिस बंदोबस्त भी मांगा गया था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ध्वस्तीकरण में निगम की कोई भूमिका नहीं है और मकान किसने तोड़े, यह जांच का विषय है।

महापौर का जवाब- जांच के बाद बताएंगे

सूरत की महापौर माया मावाणी ने विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

कांग्रेस के पूर्व पार्षद का गंभीर आरोप

कांग्रेस के पूर्व पार्षद असलम सायकलवाला ने आरोप लगाया कि ध्वस्तीकरण के समय महानगर पालिका और पुलिस के अधिकारी मौके पर मौजूद थे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास घटना के वीडियो और सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन में हिम्मत है, तो मौके पर मौजूद अधिकारियों से पूछताछ कराई जाए।

सैकड़ों लोग हुए बेघर

स्थानीय लोगों के अनुसार बिना किसी लिखित नोटिस के हुई इस कार्रवाई में 100 से अधिक गरीब और श्रमिक परिवार बेघर हो गए। कई परिवार अपने छोटे बच्चों और सामान के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। आगामी दिनों में भारी बारिश और खराब मौसम की चेतावनी के बीच यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है।

अब पूरे मामले में सभी की निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आखिर नासिरनगर में 100 से अधिक मकानों को ध्वस्त करने के पीछे कौन जिम्मेदार था।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे