पश्चिम बंगाल के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कब? विपक्षी नेता ने उठाया सवाल, छात्र भी मांग रहे जवाब
कोलकाता, 08 अगस्त (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लंबे समय से लंबित छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। नई सरकार के गठन के करीब तीन महीने बीतने के बावजूद चुनाव को लेकर अब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं होने से छात्र संगठनों में नाराजगी है। विपक्ष ने भी सरकार से तत्काल चुनाव कराने की मांग की है, जबकि उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट समयसीमा बताने से परहेज किया है।
विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने शनिवार को छात्रसंघ चुनाव जल्द कराने की मांग करते हुए कहा कि वह मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर चुनाव कराने का आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।
इसी दिन उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय से भी छात्रसंघ चुनाव को लेकर सवाल किया गया। लेकिन उन्होंने चुनाव की कोई निश्चित समयसीमा बताने के बजाय कहा कि जब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पर्याप्त संख्या में छात्र-छात्राएं लौट आएंगे, तब चुनाव कराने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परिसरों में अशांति रोकने और पढ़ाई का स्वस्थ माहौल बनाए रखने के लिए सरकार की नीति ‘शून्य सहनशीलता’ की है।
2017 के बाद अधिकांश संस्थानों में नहीं हुए चुनाव
पश्चिम बंगाल के अधिकांश कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। उस वर्ष उच्च शिक्षा विभाग ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर विशेष नियम जारी किए थे। कोलकाता, बर्दवान, विद्यासागर, उत्तर बंगाल और कल्याणी विश्वविद्यालयों तथा उनसे संबद्ध कॉलेजों में उसी वर्ष अंतिम बार चुनाव हुए थे।
हालांकि, जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्रसंघ का अंतिम चुनाव 2020 में कोरोना महामारी से ठीक पहले हुआ था। इसके बाद वहां भी चुनाव नहीं हो सके।
करीब एक दशक से अधिकांश उच्च शिक्षण संस्थानों में चुनाव नहीं होने के कारण परिसरों में छात्र राजनीति और छात्र प्रतिनिधित्व को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। पिछली सरकार के दौरान विपक्षी छात्र संगठनों ने सत्तारूढ़ दल से जुड़े छात्र संगठन पर परिसरों में दबदबे और मनमानी के आरोप लगाए थे।
मई में राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों को उम्मीद थी कि नई सरकार छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की दिशा में कदम उठाएगी। देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र आंदोलनों और छात्र राजनीति को लेकर जारी बहस के बीच पश्चिम बंगाल में भी परिसरों में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने की मांग तेज हुई है।
छात्र बोले- समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए जरूरी है छात्रसंघ
छात्रों और शिक्षकों के एक वर्ग का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव का उद्देश्य केवल परिसर की राजनीति तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि निर्वाचित छात्रसंघ छात्रों की समस्याओं और मांगों को कॉलेज एवं विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कोलकाता विश्वविद्यालय के कला विभाग के एक छात्र ने कहा कि राजनीतिक समझ और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुरुआत कॉलेज जीवन से होती है। उनके अनुसार, चुनाव नहीं होने के बावजूद राजनीति को पूरी तरह परिसरों से बाहर नहीं किया जा सका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाली पीढ़ी के छात्रों को स्वस्थ और लोकतांत्रिक माहौल मिलेगा।
जादवपुर विश्वविद्यालय के एक छात्र ने भी छात्रसंघ चुनाव को प्रशासनिक दृष्टि से जरूरी बताया। उनका कहना था कि छात्रों की समस्याओं को संगठित तरीके से प्रशासन के समक्ष रखने के लिए निर्वाचित छात्रसंघ होना चाहिए।
एसएफआई ने सभी छात्र संगठनों को चुनाव में अवसर देने की मांग की
वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई ने भी छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग दोहराई है। संगठन के राज्य सचिव देबांजन डे ने कहा कि चुनाव की मांग पिछली सरकार के समय भी की गई थी और अब नई सरकार के समक्ष भी यही मांग रखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सभी विचारधाराओं से जुड़े छात्र संगठनों को चुनाव में हिस्सा लेने का समान अवसर मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, छात्रसंघ चुनाव के जरिए ही परिसरों में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था मजबूत की जा सकती है।
डीएसओ और एबीवीपी ने भी उठाई चुनाव बहाली की मांग
ऑल इंडिया डीएसओ के राज्य सचिव विश्वजीत राय ने छात्रसंघ चुनाव को छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान चुनाव नहीं होने से सत्तारूढ़ दल के छात्र संगठन को परिसरों में अपना प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले भाजपा ने छात्रसंघ चुनाव कराने का वादा किया था। अब सरकार को अपने रुख को स्पष्ट करते हुए चुनाव कराने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग कर रही है। संगठन के कोलकाता महानगर सचिव स्वतंत्र हलदार ने कहा कि चुनाव की मांग पहले से की जा रही है। उन्होंने बताया कि कॉलेजों की प्रबंधन समितियों के गठन का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद सरकार से जल्द चुनाव कराने की मांग की जाएगी।
सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
जानकारों का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव को लेकर विपक्ष और विभिन्न छात्र संगठनों के दबाव के बीच अब निगाहें उच्च शिक्षा विभाग पर हैं। सरकार ने फिलहाल चुनाव की तारीख या प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। मंत्री के बयान के बाद यह संकेत जरूर मिला है कि परिसरों में पर्याप्त संख्या में छात्रों की वापसी के बाद चुनाव कराने पर विचार किया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

