लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र मुरादाबाद का श्री हुल्का देवी माता मंदिर
-500 वर्ष से अधिक पुराना है प्राचीन सिद्धपीठश्री हुल्का देवी माता मंदिर
-मंदिर के महंत पंडित ब्रह्मानंद गोस्वामी ने मंदिर के इतिहास के बारे में दी जानकारी
मुरादाबाद, 04 मार्च (हि.स.)। मुरादाबाद जनपद में कपूर कंपनी स्थित बना श्री हुल्का देवी माता मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। यह 500 वर्ष से अधिक पुराना प्राचीन सिद्ध पीठ मंदिर है। यहां पर होली के अगले दिन से लगने वाले 14 दिवसीय बासौड़ा मेले में लाखों श्रद्धालु पूजा अर्चना करने व प्रसाद चढ़ाने आते हैं।
श्री हुल्का देवी माता मंदिर को शीतला माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के महंत पंडित ब्रह्मानंद गोस्वामी ने हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत के दौरान बुधवार को श्री हुल्का देवी माता मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी दी। पंडित बीएन गोस्वामी ने बताया कि मंदिर वाले स्थान पर लगभग 500 वर्ष पूर्व शीतला माता स्वयं अवतरित हुईं थीं। उसके बाद यहां मठ (चामुंडा मंदिर) बना जिसमें माता की स्वयं प्रकट हुई मूर्ति को स्थापित किया गया। यहां पर पहले महंत गिरी बाबा का स्थान हुआ करता था। बाद में उनके शिष्य भागीरथ दास और हरद्वार गोस्वामी ने मठ से मंदिर का निर्माण किया।
महंत बीएन गोस्वामी ने बताया कि मंदिर परिसर में सेना की एक छावनी बनी हुई थी। यहां पर अधिकतर जवान आए दिन बीमार रहते थे। एक दिन छावनी के कैप्टन को शीतला माता ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि अगर तुम्हारे सैनिक मेरे मंदिर में मेरे दर्शन करने के साथ ही प्रसाद चढ़ाकर मेरी पूजा अर्चना करेंगे तो वह ठीक हो जाएंगे। उनकी बीमारी दूर हो जाएगी। इसके बाद छावनी कप्तान ने अपने सैनिकों के साथ माता रानी के दर्शन किए, प्रसाद चढ़ाया और पूजा अर्चना की। उसके बाद से सभी स्वस्थ रहने लगे। यह बात धीरे-धीरे लोगों को पता चली। मंदिर में लोगों के आने की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती चली गई।
दुल्हैंडी (रंग वाली होली) के अगले दिन चैत्र मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि से मंदिर में 14 दिवसीय बसौड़ा मेला प्रारंभ हो जाता हैं, जो चैत्र नवरात्र के प्रारंभ होने तक चलता है। मेले के दौरान शीतला माता के पूजन के लिए हर वर्ष मुरादाबाद के अलावा पड़ोसी जनपदों, उत्तराखंड व दिल्ली आदि राज्याें से भी श्रद्दालु आते हैं।
मंदिर परिसर में शीतला माता के अलावा काली माता, भगवान श्री विष्णु, हनुमान जी, भगवान श्री कृष्ण और शिव परिवार स्थापित हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु माता रानी को प्रसाद में बताशे, लौंग का जोड़ा, कौड़ी, फल फूल के साथ जल इत्यादि चढ़ाकर पूजा अर्चना करते हैं। मंदिर के पुरोहितों के द्वारा मोरपंखी से उनके ऊपर झाड़ा लगाया जाता है। बासौड़ा मेले में आने वाले भक्त एक दिन पूर्व घर पर बनाए गए बासी भोजन को लेकर आते हैं। माता रानी को भोग लगाते हैं। फिर परिवार संग मंदिर परिसर में बैठकर उसे ग्रहण करते हैं।
विवाह के बाद मायके में पहली होली पर आईं नव विवाहिता शीतला माता को प्रसाद चढ़कर अपनी ससुराल के लिए प्रस्थान करती हैं। बसौड़ा मेले में काफी श्रद्धालु बच्चों का मुंडन के लिए भी आते हैं। इसके अलावा नव विवाहित जोड़े माता से सुखद दांपत्य जीवन के लिए प्रसाद चढ़ाकर आशीर्वाद लेते हैं।
महंत पंडित बीएन गोस्वामी ने बताया कि मान्यता है कि होलिका दहन के बाद वायुमंडल का तापमान बढ़ता है। उसे कम करने के लिए माता शीतला पर जल चढ़ाया जाता है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि चौराहों पर होली जलने वाले स्थान पर लोग जल चढ़ाकर और शीतला माता मंदिर में जल चढ़ाकर होलिका माता/शीतला माता को शीतलता प्रदान करते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल

