आस्था के रंग: 25 वर्षों से अनूठी सेवा दे रहा ‘मद्रास कांवड़ संघ
भागलपुर, 04 अगस्त (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला में आस्था के रंग हर दिन नए रूप में दिखाई दे रहे हैं। सुलतानगंज से देवघर तक जाने वाले 105 किलोमीटर लंबे कच्चे कांवरिया पथ पर लाखों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
इस पावन यात्रा को सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन, राज्य सरकार और पर्यटन विभाग की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। लेकिन इस मेले की असली खूबसूरती वह शिव भक्त हैं, जो खुद पैदल यात्रा करते हुए रास्ते में दूसरे कांवरियों की नि:शुल्क सेवा कर रहे हैं। ऐसा ही एक अनूठा और मिसाली जत्था है 'मद्रास कांवड़ संघ'। यह संघ पिछले 25 वर्षों से लगातार अजगैबीनाथ गंगा धाम से बाबा धाम तक कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं की सेवा के लिए प्रसिद्ध है।
मद्रास कांवड़ संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि इस बार उनके जत्थे में मद्रास (चेन्नई), कर्नाटक, बेंगलुरु और राजस्थान समेत देश के अलग-अलग राज्यों से लगभग 100 महिला और पुरुष श्रद्धालु पहुंचे हैं। यह जत्था आम कांवरियों की तरह ही पैदल यात्रा करता है, लेकिन इनकी यात्रा 8 दिनों में पूरी होती है। इसका कारण यह है कि ये लोग जगह-जगह रुककर देश-विदेशी से आने वाले सभी शिव भक्तों की नि:शुल्क सेवा करते हुए आगे बढ़ते हैं। 105 किलोमीटर लंबी इस कठिन यात्रा के दौरान मद्रास कांवड़ संघ के सदस्य कांवरियों को थकान से राहत दिलाने के लिए नि:शुल्क ठंडा जल, शरबत, शिकंजी, फल और शुद्ध भोजन का वितरण करते हैं।
चिलचिलाती धूप और गर्मी के बीच इस संघ द्वारा दी जा रही राहत सामग्री कांवरियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रही है। संघ से जुड़े सभी यात्रियों ने इस वर्ष जिला प्रशासन और राज्य सरकार द्वारा कांवरिया पथ पर की गई लाइट, पानी और सुरक्षा की व्यवस्थाओं को बेहतरीन बताया। इसी बीच कांवड़ यात्रा में शामिल कर्नाटक से आए एक 'कन्नड़ बम' का अनोखा अंदाज देखने को मिला। उन्होंने कन्नड़ भाषा में देश के प्रधानमंत्री मोदी की जमकर प्रशंसा की।
श्रद्धालु ने कहा, देश को मोदी जी जैसा ही प्रधानमंत्री चाहिए। उन्होंने देश के लिए बहुत काम किया है और अभी आगे उन्हें देश हित में और भी बहुत सारे बड़े काम करने हैं। यह कांवड़ संघ इस बात का साक्षात प्रमाण है कि बाबा भोलेनाथ के दरबार में भाषा, प्रांत और राज्य की दीवारें टूट जाती हैं और पूरी कांवड़ यात्रा 'वसुधैव कुटुंबकम' के रंग में रंग जाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

