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पीढ़ियों से संरक्षित ‘चिरपोटी टमाटर’ को मिली कानूनी पहचान

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पीढ़ियों से संरक्षित ‘चिरपोटी टमाटर’ को मिली कानूनी पहचान


-संरक्षक किसान बंसी लाल सोढ़ी सम्मानित

धमतरी, 01 सितंबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला के नगरी विकासखंड के ग्राम गुहनानाला के किसान बंसी लाल सोढ़ी के परिवार द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित स्थानीय एवं पारंपरिक ‘चिरपोटी टमाटर’ किस्म को अब कानूनी पहचान मिल गई है। पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण पीपीवी एंड एफआरए (प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटी) के अंतर्गत कृषक किस्म के रूप में इसका पंजीयन किया गया है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने आज किसान बंसी लाल सोढ़ी को साल एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक विशिष्ट स्थानीय फसल किस्म के संरक्षण की पहचान नहीं है, बल्कि किसानों के पारंपरिक कृषि ज्ञान, बीज संरक्षण की परंपरा और स्थानीय कृषि जैव-विविधता को संरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। बंसी लाल सोढ़ी के परिवार में ‘चिरपोटी टमाटर’ का संरक्षण और उत्पादन उनके स्वर्गीय पिता मंगलू राम सोढ़ी के समय से किया जा रहा है। मंगलू राम सोढ़ी वर्षों तक इस स्थानीय किस्म के बीज को सुरक्षित रखते हुए इसका उत्पादन करते रहे। उनके निधन के बाद बंसी लाल सोढ़ी ने पिता की इस पारंपरिक कृषि विरासत को आगे बढ़ाया।

पीढ़ियों से संरक्षित यह स्थानीय किस्म इस बात का उदाहरण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपने अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फसल किस्मों को संरक्षित करते आए हैं। ऐसे पारंपरिक बीज स्थानीय कृषि व्यवस्था और कृषि जैव-विविधता की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।

‘चिरपोटी टमाटर’ के दस्तावेजीकरण और पंजीयन की प्रक्रिया में कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। केंद्र के माध्यम से किस्म से संबंधित जानकारी एकत्रित करने, दस्तावेजीकरण तथा आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया में सहयोग दिया गया। पीपीवी एंड एफआरए (प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटी) प्रभारी प्रेमलाल साहू के माध्यम से कृषक किस्म के पंजीयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। प्राप्त पंजीयन प्रमाण-पत्र के अनुसार ‘चिरपोटी टमाटर’ का पंजीकृत नंबर है। इसका आवेदन 07 सितंबर 2016 को दाखिल किया गया था, जबकि किस्म का पंजीयन 08 जनवरी 2024 को प्रदान किया गया। पंजीयन के माध्यम से वर्षों से किसान परिवार द्वारा संरक्षित इस स्थानीय किस्म को औपचारिक पहचान के साथ कृषक अधिकारों के संरक्षण का आधार भी प्राप्त हुआ है।

पीपीवी एंड एफआरए (प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटी) के अंतर्गत कृषक किस्म के पंजीयन से किसानों द्वारा संरक्षित स्थानीय एवं पारंपरिक फसल किस्मों को आधिकारिक पहचान मिलती है।ऐसे पंजीयन से किसानों के पारंपरिक कृषि ज्ञान और अनुभव को भी मान्यता मिलती है तथा पंजीकृत किस्मों के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और आगे के उपयोग के अवसर उपलब्ध होते हैं। साथ ही अन्य किसानों को भी अपने क्षेत्र में लंबे समय से संरक्षित विशिष्ट स्थानीय एवं पारंपरिक फसल किस्मों के दस्तावेजीकरण और पंजीयन के लिए प्रोत्साहन मिलता है।

‘चिरपोटी टमाटर’ का पंजीयन धमतरी जिले की कृषि विविधता और पारंपरिक बीज संरक्षण की समृद्ध परंपरा को पहचान दिलाने वाली उपलब्धि है। स्थानीय परिस्थितियों में किसानों द्वारा लंबे समय से संरक्षित ऐसी फसल किस्में क्षेत्र की कृषि संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और जैव-विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस उपलब्धि से जिले के अन्य किसानों को भी अपनी स्थानीय एवं विशिष्ट फसल किस्मों को संरक्षित करने तथा उनके दस्तावेजीकरण एवं पंजीयन की दिशा में आगे आने की प्रेरणा मिलेगी।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ईश्वर सिंह, सहायक संचालक कृषि मनोज सागर, पीपीवी एंड एफआरए (प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटी) प्रभारी प्रेमलाल साहू एवं डॉ. दीपिका चंद्रवंशी उपस्थित रहे। अधिकारियों एवं कृषि विशेषज्ञों ने बंसी लाल सोढ़ी को ‘चिरपोटी टमाटर’ के संरक्षण एवं पंजीयन के लिए बधाई दी। कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी ने जिले के किसानों से अपील की है कि यदि उनके पास लंबे समय से संरक्षित कोई विशिष्ट स्थानीय अथवा पारंपरिक फसल किस्म, बीज या कृषि संसाधन उपलब्ध है, तो उसकी जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र तक पहुंचाएं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा