घाटे पर भारी जन-संतुष्टि : क्यों मोहन सरकार के लिए 'पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा' का हर रुपया एक निवेश है?
डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भोपाल, 22 सितंबर (हि.स.)। क्या किसी लोक-कल्याणकारी सरकार के फैसलों को कॉरपोरेट बैलेंस-शीट के नफ़े-नुकसान से मापा जा सकता है? मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने 'पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा' के जरिए इस रूढ़िवादी सोच को पूरी तरह बदल दिया है। जून 2024 से शुरू हुई यह अंतरराज्यीय हवाई सेवा भले ही वित्तीय खातों में 'घाटे' का सौदा दिख रही हो, पर विंध्य से लेकर महाकौशल और मालवा से लेकर बुंदेलखंड तक फैले इस सूबे में इसके जरिए जो 'समय की बचत', 'आर्थिक गतिशीलता' और 'पर्यटन संतुष्टि' पैदा हो रही है, उसने सरकार के इस घाटे को राज्य के सुनहरे भविष्य के एक बेहतरीन निवेश में तब्दील कर दिया है।
दरअसल, ये एक ऐसी इबारत है, जहाँ व्यावसायिक मुनाफे पर जनता की आत्मसंतुष्टि भारी पड़ रही है। वैसे भी सरकार का मूल धर्म जनता के जीवन को सुगम, सुरक्षित और समृद्ध बनाना है। जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 जून 2024 को भोपाल के राजा भोज हवाई अड्डे से जबलपुर के लिए इस सेवा के पहले विमान को हरी झंडी दिखाई थी, तो उनके मन में वित्तीय घाटे से अधिक संकल्प इस बात का झलक रहा था कि राज्य के सुदूर अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ना अब ओर अधिक आसान हो जाएगा, इसलिए सरकार ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत एक ऐसा हवाई नेटवर्क तैयार किया, जिसका उद्देश्य सीधे तौर पर आय के स्थान पर राज्य के विकास को पंख लगाना रहा।
उल्लेखनीय है कि इसे उड्डयन जगत में 'लॉस-लीडर' मॉडल कहा जाता है, जहाँ एक सेवा में जानबूझकर घाटा उठाया जाता है ताकि वह राज्य की पूरी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े इंजन का काम कर सके।इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर क्रियान्वित करने के लिए मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड (एमपीटीबी) ने निजी विमानन ऑपरेटरों के साथ रणनीतिक साझेदारी की है।
जेट सर्व एविएशन प्राइवेट लिमिटेड यह इस योजना की मुख्य परिचालन भागीदार है। यह कंपनी 'फ्लाईओला' ब्रांड नाम के तहत टिकटों की बुकिंग और दैनिक उड़ानों का प्रबंधन संभालती है। इसके बेड़े में शामिल दोहरे इंजन वाले छह से आठ सीटर अत्याधुनिक विमान राज्य के आसमान में नियमित रूप से कनेक्टिविटी प्रदान कर रहे हैं।
इस योजना के दूसरे चरण यानी नवंबर 2025 में जब हेलीकॉप्टर टूरिज्म सर्किट का विस्तार किया गया, तब इस कंपनी को विशेष रूप से राष्ट्रीय उद्यानों और दुर्गम धार्मिक स्थलों को जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्तमान में सेवा से जुड़े आठ मुख्य केंद्र भोपाल जिसे प्रशासनिक और राजनीतिक धुरी के रूप में, इंदौर- औद्योगिक नजरिए से जबलपुर को न्यायिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में, ग्वालियर- ऐतिहासिक और कलात्मक धरोहर, उज्जैन को महाकाल की पावन नगरी, आध्यात्मिक केंद्र के कारण से, रीवा-विंध्य क्षेत्र का प्रवेश द्वार होने तथा खजुराहो-यूनेस्को की वैश्विक धरोहर और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल एवं सिंगरौली को राज्य की ऊर्जा राजधानी होने के कारण से इस योजना के साथ जोड़े गए हैं।
घाटे की गहराई और सब्सिडी का गणित
जून 2024 में इसकी शुरुआत से लेकर वर्तमान तक की 27 महीनों से अधिक की अवधि में अगर हम वित्तीय संतुलन की बात करें, तो यह योजना पूरी तरह राज्य सरकार के वित्तीय सहयोग पर टिकी है। एविएशन इंडस्ट्री के विशेषज्ञों और विधानसभा में पेश किए गए अनुदान मांगों के रुझानों के अनुसार, इस अवधि में सरकार का कुल अनुमानित व्यय ₹65 करोड़ से ₹90 करोड़ के बीच रहा है।
खर्च का मद-वार विवरण
सब्सिडी और वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) मद में सरकार अब तक अनुमानतः ₹20 से ₹30 करोड़ खर्च कर चुकी है। चूंकि छह से आठ सीटर छोटे विमानों को उड़ाने की प्रति घंटा लागत विमानन ईंधन (एएफटी), पायलट वेतन और ग्राउंड हैंडलिंग के कारण ₹4.75 लाख से ₹5.70 लाख तक आती है, इसलिए टिकट की कीमतों को आम जनता के लिए ₹2,000 से ₹4,500 के बीच बनाए रखने के लिए सरकार भारी सब्सिडी दे रही है। शुरुआत में 70 से 80 फीसद सीटें खाली जाने के कारण इस खालीपन का पूरा हर्जाना सरकार ने खुद भुगता है।
अधिकारिक जानकारी के अनुसार, बुनियादी ढांचा विकास के तहत गैर-सब्सिडी मदों में सरकार ने जिला स्तरीय हवाई पट्टियों जैसे रीवा, सिंगरौली, और उज्जैन के रनवे को अपग्रेड करने, वीआईपी टर्मिनल बनाने और नाइट-लैंडिंग (रात में विमान उतारने की सुविधा) के लिए सिग्नल उपकरण लगाने में ₹45 से ₹60 करोड़ का बड़ा वन-टाइम निवेश किया है।
इसके मुकाबले, अगर हम प्रत्यक्ष टिकट राजस्व की बात करें, तो अब तक यात्रा कर चुके 10,000 से अधिक यात्रियों से लगभग ₹3 करोड़ से ₹4 करोड़ की ही प्रत्यक्ष वसूली हो सकी है। वित्तीय दृष्टिकोण से यह भारी घाटा है, मगर डॉ. मोहन यादव की भाजपा सरकार के विजन में यह घाटा सामाजिक न्याय की कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरता है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश सरकार का स्पष्ट मानना है कि जनता के चेहरे पर आने वाली आत्मसंतुष्टि और उनके समय की बचत को रुपयों के तराजू में नहीं तोला जा सकता। इस योजना ने मध्य प्रदेश के नागरिकों को वह अनुभव दिया है जो पहले केवल चुनिंदा अमीर वर्ग तक सीमित था।
समय का ऐतिहासिक संकुचित होना
पहले सड़क मार्ग या ट्रेनों से विंध्य (भोपाल से सिंगरौली/रीवा) क्षेत्र की यात्रा करने में 10 से 14 घंटे का समय लगता था, जिससे यात्रियों की आधी ऊर्जा सफर में ही नष्ट हो जाती थी। आज पीएम श्री वायु सेवा के विमान से यह सफर मात्र 1.5 से 2 घंटे में पूरा हो जाता है। मालवा और महाकौशल के व्यापारियों के लिए यह सेवा वरदान साबित हुई है। कोई भी उद्यमी सुबह इंदौर से उड़कर जबलपुर में अपनी व्यावसायिक बैठकें निपटा सकता है और शाम की फ्लाइट से वापस अपने घर लौट जाता है, यही कारण है कि अब एक नया इंदौर से जबलपुर व्यापारिक गलियारा बन गया है।
धार्मिक और वन्यजीव पर्यटन में आत्मसंतुष्टि
जब कोई बुजुर्ग दंपत्ति भोपाल से उड़कर कुछ ही मिनटों में खजुराहो के मंदिर देख लेता है या इंदौर से बैठकर उज्जैन महाकाल लोक और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की हवाई यात्रा 'पीएम श्री पर्यटन सेवा' के जरिए पूरी करता है, तो उनके मन को मिलने वाली आध्यात्मिक शांति और संतुष्टि ही सरकार का सबसे बड़ा लाभांश है। सरकार ने पर्यटन को विलासिता के दायरे से निकालकर आम आदमी की पहुँच में ला दिया है।
परोक्ष आर्थिक लाभ: ₹50,000 करोड़ की पर्यटन अर्थव्यवस्था का विजन
जीवाजी विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, वाणिज्य एवं व्यवसाय अध्ययनशाला एस. के. सिंह का कहना है, “नीतिगत रूप से जो पैसा टिकटों पर सब्सिडी के रूप में खर्च हो रहा है, वह राज्य की मुख्य अर्थव्यवस्था में कई गुना होकर वापस लौट रहा है। इसे अर्थशास्त्र में 'इकोनॉमिक मल्टीप्लायर इफेक्ट' कहते हैं। मोहन सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक मध्य प्रदेश की पर्यटन अर्थव्यवस्था को ₹50,000 करोड़ तक पहुँचाना है, और यह हवाई सेवा उस लक्ष्य की रीढ़ के रूप में हम सभी के द्वारा देखी जानी चाहिए।”
प्रो. एस. के. सिंह यह जोड़ते हैं, “पिछले कुछ सालों में प्रदेश में औद्योगिक निवेश का आकर्षण बढ़ा है, सिंगरौली जैसे खनिज समृद्ध जिलों में बड़े उद्योगपति सिर्फ इसलिए जाने से कतराते थे क्योंकि वहां पहुंचने में बहुत समय लगता था और कोई इमरजेंसी कनेक्टिविटी नहीं थी। अब भोपाल-इंदौर से सीधी हवाई सेवा होने के कारण वैश्विक और राष्ट्रीय कंपनियां मध्य प्रदेश के सुदूर जिलों में अपने प्लांट लगाने के लिए आकर्षित हो रही हैं।”
इसके साथ ही प्रो. सिंह का कहना यह भी रहा, कल्याणकारी राज्य के किसी निर्णय को केवल उसके प्रत्यक्ष वित्तीय लाभ-हानि से नहीं परखा जा सकता। यदि किसी सार्वजनिक निवेश से जनता का हित और भला होता है, नागरिकों का समय बचता है, दूरस्थ क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बढ़ती है, पर्यटन और व्यापार को गति मिलती है तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं, तो वह खर्च वस्तुतः भविष्य के आर्थिक विकास में निवेश है। पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा को इसी व्यापक सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए- क्योंकि सरकार का वास्तविक प्रतिफल केवल राजस्व नहीं, बल्कि जनकल्याण, बेहतर जीवन और मजबूत क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था भी है।
दूसरी ओर टूरिस्ट क्षेत्र में विनिर्माण से जुड़े शास्त्री बिल्डर्स के प्रमुख बालचंद्र शास्त्री और मृणाल शास्त्री का कहना है कि हवाई कनेक्टिविटी के कारण खजुराहो, कान्हा, बांधवगढ़ और ओरछा में पर्यटकों का आना-जाना बढ़ा है। जब पर्यटक हवाई जहाज से आते हैं, तो वे स्थानीय होटलों में रुकते हैं, स्थानीय गाइडों की सेवाएं लेते हैं और स्थानीय टैक्सियों का उपयोग करते हैं। इससे जमीनी स्तर पर हजारों युवाओं को रोजगार मिल रहा है।
उन्होंने कहा, इसके साथ ही यह भी दिखाई दे रहा है कि यात्रियों की खर्च करने की क्षमता अधिक होने का लाभ मप्र के स्थानीय व्यक्तियों को भी मिल रहा है। वे मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर जैसे चंदेरी और महेश्वरी साड़ियां, गोंड पेंटिंग्स और हस्तशिल्प की जमकर खरीदारी करते हैं। इसका सीधा लाभ ग्रामीण बुनकरों और शिल्पकारों को मिल रहा है।
एक संवेदनशील और दूरदर्शी शासन का प्रतीक
एक अधिकारी ने कहा, जिस प्रकार एक माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य पर होने वाले खर्च को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निवेश मानते हैं, ठीक उसी प्रकार मोहन सरकार इस योजना पर होने वाले हर एक रुपये को मध्य प्रदेश के स्वर्णिम कल का निवेश मान रही है। आने वाले समय में जब मध्य प्रदेश का पर्यटन उद्योग देश में शीर्ष पर होगा और सुदूर अंचलों में समृद्धि आएगी, तब इस घाटे की नींव पर खड़ी की गई हवाई सेवा को राज्य के आर्थिक और सामाजिक पुनर्जागरण का सबसे बड़ा मील का पत्थर माना जाएगा।
फिलहाल मोहन सरकार के इस नजरिए से यही दिखता है कि जनता की मुस्कान और संतुष्टि के आगे करोड़ों का घाटा भी उसके लिए बौना है। 'पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा' सरकार की संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और जन-केंद्रित शासन का एक जीता-जागता प्रमाण है। विधानसभा के वित्तीय प्रतिवेदनों से लेकर जमीनी हकीकत तक, भले ही यह योजना वित्तीय खातों में घाटे में दर्ज हो, मगर जनता के कल्याण, समय की बचत और पर्यटन से मिलने वाली आत्मसंतुष्टि के पैमाने पर यह बेहद मुनाफेदार साबित हो रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

