‘पंख अभियान’ से बदली मप्र के नीमच जिले के बांछड़ा बेटियों की किस्मत, कु-प्रथा से निकलकर बनीं सशक्त
- प्रशासन की अभिनव पहल की मुख्य धारा से जुड़ रही हैं बेटियांभोपाल, 21 अप्रैल (हि.स.)। जब इरादे मजबूत हों और प्रशासन का सहयोग मिले, तो सदियों पुरानी बेड़ियां भी टूट जाती हैं। इसका उदाहरण नीमच जिले में देखने को मिला। यहां जिला प्रशासन की अभिनव पहल 'पंख अभियान' आज बांछड़ा समुदाय की उन बेटियों के लिए उम्मीद का उजाला बनकर उभरा है, जो कभी सामाजिक बहिष्कार और पीढ़ीगत मजबूरियों के अंधेरे में खोई हुई थीं।
दरअसल, बांछड़ा समुदाय ऐतिहासिक रूप से आर्थिक अभाव और कुछ शोषणकारी सामाजिक कु-प्रथाओं के कारण हाशिए पर रहा है। यहां की बालिकाओं के लिए 'देह-व्यापार' जैसी मजबूरियां उनके भविष्य के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा थीं। लेकिन 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' की मूल भावना को धरातल पर उतारते हुए नीमच जिला प्रशासन ने पंख अभियान के माध्यम से इस अभिशाप को गरिमा में बदलने का बीड़ा उठाया है।
वर्दी पहनने का सपना हो रहा साकार
जनसंपर्क अधिकारी बिन्दु सुनील ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि 'सशक्त वाहिनी' योजना है। जहां कल तक इन गलियों में असुरक्षा का साया था, आज वहां की 14 बेटियां पुलिस और अर्धसैनिक बलों में भर्ती होने के लिए पसीना बहा रही हैं। प्रशासन इन्हें न केवल निःशुल्क शैक्षणिक मार्गदर्शन दे रहा है, बल्कि शारीरिक प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें देश सेवा के लिए तैयार कर रहा है। यह केवल एक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान की बहाली है।
हुनर से बदली हाथों की लकीरें
केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि 'पंख अभियान' आर्थिक स्वावलंबन का भी सेतु बना है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 30 महिलाओं और बालिकाओं को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ा गया है। पशुपालन, बकरी पालन, सिलाई, ब्यूटी पार्लर और मसाला प्रसंस्करण जैसे कार्यों के प्रशिक्षण ने उन्हें 'मजबूरी की कमाई' से निकालकर 'मेहनत की कमाई' की ओर मोड़ दिया है।
जमीनी स्तर पर बदलाव का ढांचा
बदलाव केवल बातों में नहीं, बल्कि आंकड़ों में भी नजर आ रहा है। प्रशासन ने बांछड़ा बाहुल्य ग्रामों में 26 आंगनबाड़ी केंद्रों में विशेष 'सहायता केंद्र' स्थापित किए गए।48 स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों के माध्यम से अंतिम पंक्ति की महिला तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं। 25 जागरूकता सत्र और करियर मार्गदर्शन के माध्यम से समुदाय की सोच में सकारात्मक बदलाव लाया गया।
सामूहिक प्रयास, सुखद परिणाम
इस अभियान में विभिन्न विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं का समन्वय देखने को मिल रहा है। 'पंख' अभियान ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही दिशा और संवेदनशीलता के साथ प्रयास किए जाएं, तो कोई भी समुदाय पिछड़ा नहीं रहता। अभियान का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि बांछड़ा समुदाय की बेटियों के भीतर उस आत्मविश्वास को जगाना है कि वे अपनी नियति खुद लिख सकें। आज ये बेटियाँ भय और मजबूरी के दायरे से बाहर निकलकर शिक्षा और रोजगार के नए आसमान में उड़ान भर रही हैं।_______________
हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

